Friday, May 15, 2026
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निकाय प्रमुख के लिए पार्षद होना होगा जरूरी, आलाकमान का फैसला…!

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नई दिल्ली। राजस्थान में निकाय अध्यक्ष चुनाव प्रक्रिया पर हुए विवाद और नेताओं की बयानबाजी को थामने के लिए आखिरकार कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं को पहल करनी पड़ गई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे ने कहा है कि निकाय अध्यक्ष चुनाव लडऩे के लिए पार्षद नहीं होने की शर्त को हटाया जाएगा। संगठन ने निर्णय कर दिया और अब सरकार नियम संशोधन करेगी। यह बात उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल से बात करने के बाद कही है।

आपको बता दें कि राजस्‍थन में पार्षद बने बिना निकाय अध्यक्ष चुनाव लडऩे के नियम से पिछले कुछ दिनों से सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इस नियम का उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पायलट समेत कई मंत्री खुलेतौर पर विरोध कर रहे हैं, जबकि यूडीएच मंत्री धारीवाल इस नियम को 2009 में पारित विधेयक का हिस्सा बता रहे हैं।

पांडे ने सीएम गहलोत, डिप्टी सीएम पायलट और मंत्री धारीवाल से संपर्क किया। इसके बाद पांडे ने बुधवार को बताया कि पार्षद नहीं होने के बावजूद निकाय अध्यक्ष का चुनाव लडऩे का नियम नया नहीं बनाया गया है। यह 2009 से ही लागू था, लेकिन किसी का इस पर ध्यान नहीं गया। अब जबकि यह मामला सामने आया और पायलट ने जनता की आवाज उठाते हुए इसे लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं बताया। ऐसे में सभी से वार्ता की गई। सरकार इस नियम को वापस लेने पर सहमत है। जल्द ही इसमें संशोधन किया जाएगा। यहां यह उल्‍लेखनीय है कि परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास व खाद्य व आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा ने भी गैर पार्षद के निकाय प्रमुख का चुनाव लडने के नियम का विरोध किया था।

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