






आज 28 सितंबर, विश्व रेबीज दिवस है। हर साल इस दिन को हम महान वैज्ञानिक लुई पाश्चर की पुण्यतिथि पर मनाते हैं, जिन्होंने रेबीज के टीके की खोज करके लाखों जानें बचाईं। एक बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में मेरे लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मेरे क्लिनिक में कुत्ते के काटने से जो 10 बच्चे आते हैं, उनमें से 6 की उम्र 15 साल से कम होती है। बच्चा छोटा है, कद छोटा है, तो काटा भी अक्सर चेहरे और गर्दन पर जाता है जो सबसे खतरनाक है। और बच्चा डर के मारे कई बार घर पर बताता भी नहीं है।
रेबीज क्या है? एक सच्चाई जो हर माता-पिता को पता होनी चाहिए
रेबीज 100% घातक है, लेकिन 100% रोका जा सकता है। एक बार लक्षण आ गए- पानी से डरना, हवा से डरना, बुखार, बेचैनी- तो दुनिया की कोई दवा नहीं बचा सकती। लेकिन काटने के तुरंत बाद सही कदम उठा लिया जाए तो जीवन 100% बच जाता है।
बच्चे को कुता काट ले तो सबसे पहले क्या करें? याद रखें - ABC
मेरे पास आने वाले हर माता-पिता को मैं यही सिखाता हूँ:
A. Wash / धोना : सबसे जरूरी। घाव को तुरंत बहते नल के पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक धोएं। यह एक अकेला कदम वायरस को 70-80% तक निकाल देता है। हल्दी, मिर्च, चूना, टूथपेस्ट बिल्कुल न लगाएं।
B. Doctor / डॉक्टर से मिलें : देर न करें। सरकारी अस्पताल या अपने डॉक्टर के पास जाएं। डॉक्टर तय करेंगे कि वैक्सीन के साथ-साथ RIG (Rabies Immunoglobulin) की जरूरत है या नहीं।
C. Vaccination / टीकाकरण : पुराने जमाने वाले पेट में 14 इंजेक्शन अब नहीं लगते। अब तो बांह में 4-5 छोटे-छोटे टीके लगते हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं। कोर्स को कभी बीच में न छोड़ें।
मेरे अनुभव से 3 बड़े भ्रम जो जानलेवा हैं
1. “घर का पालतू कुत्ता है, कुछ नहीं होगा” – सबसे बड़ा भ्रम। अगर कुत्ते का रेबीज टीकाकरण पूरा नहीं है, तो घर का कुत्ता भी उतना ही खतरनाक है जितना गली का।
2. “खरोंच ही तो है, खून नहीं निकला” – जीभ से चाटना, नाखून लगना या छोटी खरोंच भी रेबीज फैला सकती है। हर Animal Contact को गंभीरता से लें।
3. “एक बार टीका लग गया तो जिंदगी भर के लिए सुरक्षित” – नहीं। हर बार नए काटने पर फिर से डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
आज के दिन का संकल्प
इस विश्व रेबीज दिवस पर आइए हम तीन संकल्प लें:
1. अपने बच्चों को सिखाएं : अनजान कुत्तों को न छेड़ें, उन्हें खाना खिलाते समय दूरी रखें, और यदि कुत्ता काट ले तो तुरंत मम्मी-पापा को बताएं।
2. अपने पालतू जानवर का टीकाकरण : अपने डॉगी का हर साल रेबीज टीका जरूर लगवाएं। यह आपके बच्चे की सुरक्षा कवच है।
3. जागरूकता फैलाएं : इस जानकारी को एक अन्य माता-पिता तक जरूर पहुंचाएं।
याद रखिए, कुता दुश्मन नहीं है, अज्ञानता दुश्मन है। सही जानकारी और समय पर टीका ही रेबीज का एकमात्र इलाज है। आइए, हम सब मिलकर दुनिया को एक स्वस्थ और सुरक्षित स्थान बनाएं। -डॉ. श्याम अग्रवाल, बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ, बीकानेर, 9214089206







