Friday, April 24, 2026
Hometrendingहोलिका दहन को लेकर बीकानेर के पञ्चाङ्गकर्त्ताओं व ज्योतिषाचार्यों का मत साफ,...

होलिका दहन को लेकर बीकानेर के पञ्चाङ्गकर्त्ताओं व ज्योतिषाचार्यों का मत साफ, भद्रा समाप्ति के बाद का समय श्रेष्‍ठ

AdAdAdAdAdAdAd

बीकानेर Abhayindia.com होलिका दहन को लेकर संपूर्ण भारत में फैले भ्रम को लेकर बीकानेर के पञ्चाङ्गकर्त्ता, ज्योतिषाचार्य एवं गणमान्य विद्वानों द्वारा इस विषय पर प्रेस वार्ता का आयोजन रखा गया। वार्ता में सभी विद्वानों द्वारा शास्त्र सम्‍मत निर्णय प्रस्तुत किया गया।

वार्ता के दौरान वसुदेव कृष्ण धर्मसागर पञ्चाङ्गकर्त्ता, ज्योतिषाचार्य पं. अशोक कुमार ओझा ने बताया कि भद्रा में होलिका दहन करना पूर्ण रूप से मना है इसलिए इस वर्ष माला घोलाई 2 मार्च को सायं 4:23 तक करना चाहिए एवं होलिका दहन रात्रि शेष अर्थात 3 मार्च को प्रात: 4:6 के बाद प्रात: 6:38 बजे तक करना ही शास्त्र सम्‍मत है। उन्‍होंने बताया कि 3 मार्च को चन्द्र ग्रहण दोपहर 3:28 से प्रारंभ होगा परन्तु बीकानेर में यह ग्रहण सायं 6:38 से चन्द्रोदय के साथ दृश्य होगा जिसकी समाप्ति सायं 6:50 पर होगी। अर्थात बीकानेर में यह ग्रहण मात्र 12 मिनट ही दृश्य होगा, जिसका सूतक काल 3 मार्च को प्रात: 6:38 से मान्य होगा एवं धूलंडी भी 3 मार्च को ही मानी जायेगी।

ज्योतिषाचार्य पं. गिरिजाशंकर ओझा ने बताया कि सूतक काल में भोजनादि स्पर्श का निषेध है परन्तु बाल, रोगी, गर्भवती महिलाओं एवं वृद्ध जनों के लिए इनका दोष नहीं लगता। ज्योतिषाचार्य पं. कालीचरण एवं ज्योतिषाचार्य पं. विनोद ओझा ने बताया कि भारत के अन्य पंचांगों में भी भद्रा के समाप्ति के बाद का निर्णय ही दिया हुआ है एवं इस वर्ष तो भद्रा समाप्ति के बाद भी 2 घण्टे से भी ज्यादा का समय प्राप्त हो रहा है इसलिए भ्रम की कोई स्थिति नहीं है।

शास्त्री योगेश ने बताया कि सूतक से पूर्व कन्याओं द्वारा गणगौर पूजन किया जा सकता है। प्रेस वार्ता में ज्योतिषाचार्य पं. आशीष भादाणी, पं. वीरेंद्र, पं. कृष्णकांत, पं. सोमदत्‍त आचार्य, पं. भवरलाल बोहरा, पं. राकेश देराश्री, पं. गोपाल भादाणी, पं. विराट सागर, पं. प्रदीप, पं. शिवशंकर, पं. किशन आदि विद्वानों ने इस निर्णयों में सम्‍मति प्रदान कर जनता को भद्रा समाप्ति के बाद ही होलिका दहन करना श्रेष्ठ बतायाा।

- Advertisment -

Most Popular

error: Content is protected !!