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बीकानेर में किसका सियासी असर है धाकड़? नगर निगम के नतीजों में छिपा है राज, जानिये- बाड़ेबंदी और बागियों को लेकर रणनीति..

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बीकानेर Abhayindia.com नगर निगम चुनाव में 68.91% वोटिंग के साथ ही बीकानेर की सियासत अब बूथ से निकलकर बाड़ेबंदी के रिसॉर्ट तक पहुंच गई है। ऊपर से शांति है, अंदर खाने दोनों पार्टियों में पार्षदों को साधने की होड़ मची है। यह चुनाव पार्षद का नहीं, दिग्गजों की इज्जत का बन गया है।

भाजपा में 3 धड़ों की अग्निपरीक्षा

1. अर्जुनराम मेघवाल फैक्टर : केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के लिए यह चुनाव लिटमस टेस्ट है। निगम में बोर्ड बनता है तो दिल्ली तक संदेश जाएगा कि बीकानेर आज भी मेघवाल के इशारे पर चलता है।

2. जेठानंद व्‍यास और सिद्धि कुमारी : बीकानेर पश्चिम और पूर्व की दो सीटें निगम में आधी-आधी बंटी हैं। पश्चिम में जेठानंद व्यास और पूर्व में सिद्धि कुमारी को अपने-अपने इलाके में कितने पार्षद जिताने हैं, इससे उनकी विधायकी की पकड़ तय होगी। कल वार्ड 45 में बूथ पर हुई बदसलूकी के बाद जेठानंद का पारा हाई है।

3. गोपाल गहलोत की वापसी : पूर्व जिलाध्यक्ष गोपाल गहलोत साइडलाइन चल रहे थे, इस चुनाव में उन्होंने अपनी टीम उतारी है। अगर उनके समर्थक अच्‍छी खासी संख्‍या में जीतते हैं तो वे फिर से संगठन में धाकड़ नेता बनकर उभरेंगे। बोर्ड बनाने को लेकर बाड़ेबंदी और बागियों व निर्दलीयों को साधने की उनकी रणन‍ीति कोई नया गुल खिला सकती है।

कांग्रेस में कल्ला की आखिरी बाजी!

कांग्रेस के लिए यह करो या मरो वाला चुनाव है। पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के लिए यह राजनीतिक विरासत बचाने का आखिरी मौका है। अगर कांग्रेस बोर्ड बनाती है तो कल्ला फिर से शहर की राजनीति के केंद्र में आ जाएंगे, नहीं तो सियासी विरासत को कायम रखना मुश्किल होगा। उनके साथ शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल और पूर्व अध्यक्ष यशपाल गहलोत की कुर्सी भी दांव पर है।

असली खेल करेंगे बागी और निर्दलीय!

इस बार 20 से ज्यादा वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के बागी ही खेल बिगाड़ रहे हैं। हॉट वार्डों में निर्दलीय किंगमेकर बन रहे हैं। दोनों पार्टियों को पता है कि 80 में से 41 का जादुई आंकड़ा अकेले छूना मुश्किल है। इसलिए अभी से फोन कॉल शुरू हो गए हैं। सूत्र बता रहे हैं कि निर्दलीय प्रत्याशियों को 11 सितंबर तक मॉनिटर किया जा रहा है।

कहां होगी बाड़ेबंदी?

भाजपा का प्लान : सरकार राजस्थान में है तो भाजपा बीकानेर के होटलों या जोधपुर के रिसॉर्ट में अपने पार्षदों को रखने की तैयारी में है। पश्चिम और पूर्व के पार्षदों की अलग-अलग बाड़ेबंदी होगी ताकि टूट न हो।

कांग्रेस का प्लान : कांग्रेस को खरीद-फरोख्त का डर है, इसलिए वह पार्षदों को राजस्थान से बाहर, पंजाब या दिल्ली के रिसॉर्ट में ले जाने की रणनीति बना रही है। 14 सितंबर को मतगणना है, लेकिन 14 से पहले ही दोनों पार्टियों ने बोर्ड बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। बीकानेर में धाकड़ कौन, संभव है इसका फैसला निर्दलीय करेंगे। -सुरेश बोड़ा, संपादक, अभय इंडिया

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