Thursday, June 13, 2024
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ऑर्डर-ऑर्डर : दोहरी पदोन्नति प्रदान करने का आदेश, माध्यमिक शिक्षा का मामला

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जोधपुर Abhayindia.com राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण जयपुर चलपीठ, जोधपुर ने प्रार्थी दिनेश कुमार मेघवाल की ओर से प्रस्तुत अपील को स्वीकार करते हुए उसे वर्ष 2010-11 की रिक्तियों के विरूद्ध स्कूल व्याख्याता एवं उसके बाद वर्ष 2018-2019 की रिक्तियों के विरूद्ध प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति देने का आदेश पारित किया है।

मामले के अनुसार, तहसील सालासर जिला चूरू निवासी दिनेश कुमार मेघवाल की नियुक्ति अध्यापक ग्रेड द्वितीय के पद पर 22.12.1996 को हुई थी। नियुक्ति के बाद वर्ष 2005 में प्रार्थी ने राजनीति विज्ञान में स्नातकोतर (एम..) की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। प्रार्थी की योग्यता भी वर्ष 2005 में सहायक निदेशक माध्यमिक शिक्षा चूरू द्वारा उसकी सर्विस बुक में इन्द्राज कर ली गई। विभाग द्वारा उसकी सर्विस बुक में की गयी इन्द्राज के बाद उसे वरिष्‍ठता भी उसी अनुरूप प्रदान कर दी गई। कालांतर में प्रार्थी से कनिष्‍ठ कर्मचारियों को वर्ष 2010-2011 की रिक्तियों के विरूद्ध स्कूल व्याख्याता के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई। लेकिन, प्रार्थी को वर्ष 2013-2014 की रिक्तियों के विरूद्ध स्कूल व्याख्याता के पद पर राजस्थान शिक्षा सेवा नियमों के तहत पदोन्नति प्रदान की गई व बाद में वर्ष 2018-2019 की रिक्तियों के विरूद्ध प्रार्थी से कनिष्‍ठ स्कूल व्याख्याताओं को पुनः प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति प्रदान कर दी गई लेकिन, विभाग द्वारा प्रार्थी को प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति प्रदान नहीं की गई। अपीलार्थी को प्रधानाचार्य के पद विरूद्ध पदौन्नति नहीं देने के स्कूल व्याख्याता के पद पर देरी से पदौन्नति देने के कारण प्रार्थी ने कई अभ्यावदेन प्रस्तुत किये व अंत मे अपने अधिवक्ता के माध्यम से विधिक नोटिस भी भेजा मगर विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई। विभाग के इस कृत्य से व्यथित होकर प्रार्थी ने अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से एक अपील अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की।

प्रार्थी के अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा का अधिकरण के समक्ष यह तर्क दिया कि प्रार्थी द्वारा अपने योग्यता अभिवृद्धि वर्ष 2005 मे ही अर्जित कर ली गई व विभाग द्वारा उसकी सर्विस बुक में इन्द्राज भी वर्ष 2005 से ही कर दिया गया। इसके बाद भी विभाग द्वारा प्रथम तो उसे स्कूल व्याख्याता के पद पर देरी से पदौन्नति प्रदान करना यानि वर्ष 2013-2014 की रिक्तियों के विरूद्ध पदौन्नति प्रदान करना जबकि उससे कनिष्‍ठ कर्मचारियों को वरिष्‍ठ 2010-2011 की रिक्तियों के विरूद्ध पदौन्नति करना अनुचित है जबकि वरिष्‍ठता का भी उचित निर्धारण कर लिया गया। इसके बाद कनिष्‍ठ स्कूल व्याख्याताओं को वर्ष 2018-2019 की रिक्तियों के विरूद्ध प्रधानाचार्य के पद पर पदौन्नति प्रदान करना एवं प्रार्थी को यह लाभ प्रदान करना विधि सम्मत नहीं है।

प्रार्थी के अधिवक्ता के तर्को से सहमत होते हुए अधिकरण ने प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत अपील को स्वीकार करते हुए उसे उससे कनिष्‍ठ कर्मचारियों को जिस दिन से स्कूल व्याख्याता के पद पर पदोन्नति प्रदान की गयी उसी दिन से स्कूल व्याख्याता के पद पर पदौन्नति प्रदान करने व उसके बाद उसे भी वर्ष 2018-2019 की रिक्तियों के विरूद्ध प्रधानाचार्य के पद पर पदौन्नति प्रदान करने का आदेश प्रदान किया साथ ही माध्यमिक शिक्षा विभाग को आदेश की पूर्ण पालना तीन माह के भीतर करने का आदेश दिया।

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