Homeबीकानेरशिक्षक भर्ती 99 प्रकरण : ...और बगलें झांकने लगे मंत्री डोटासरा!

शिक्षक भर्ती 99 प्रकरण : …और बगलें झांकने लगे मंत्री डोटासरा!

बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर जिला परिषद में वर्ष 1999 में शिक्षक भर्ती  प्रकरण लालफीताशाही का शिकार हो गया है। विभाग के अधिकारी आवेदकों को अलग जवाब देते है व मंत्री को अलग जिससे कई बार मंत्रियों को जनता के सामने जवाब देते नहीं बनता। ताजा प्रकरण शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के बीकानेर दौरे के दौरान का है। वर्षों से आंदोलनरत शिक्षकों ने सर्किट हाउस में  शिक्षा मंत्री डोटासरा के समक्ष अपनी समस्या रखी, लेकिन मंत्री  ने उन्हें कहा कि इस  मामले पर अदालत की रोक है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया उसी समय चयनित शिक्षकों के प्रतिनिधियों ने विभाग के डायरेक्टर से मिले जवाब को दिखाया जिसमें इस इस भर्ती पर सरकार की रोक की लगना बताया गया। वह इसे हटाने का लिए सक्षम भी सरकार को ही बताया गया है। बेरोजगारों के उस दस्तावेज को दिखाने पर डोटासरा एकबारगी सकते में आ गए। बाद में उन्होंने इस प्रकरण पर कार्यवाही का आश्वासन देकर प्रतिनिधिमंडल को रवाना किया। बताते हैं कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला की सलाह पर डोटासरा से मिलने गए बेरोजगार शिक्षकों को इस हालात से दो-चार होना पड़ा।

यहां गौरतलब है कि  जिला परिषद् बीकानेर मे 1999 मे 250 पदों पर भर्ती निकाली एवं जिसके लिए सम्पूर्ण भर्ती प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई थी। इस दौरान  एक सरकारी आदेश के माध्यम से इस पर रोक लगा दी गई, जो इस भर्ती प्रक्रिया के लम्बित होने का कारण बनाI इसके लिए सभी चयनित लम्बे समय से संघर्षरत है। इस भर्ती के लिए आंदोलन का एक लंबा दौर चला। अर्द्धनग्न प्रदर्शन से लेकर आमरण अनशन तक हुए। आंदोलनकारियों को अनशन के चलते कई बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इस आंदोलन का इतना असर हुआ कि विभाग ने कई बार पत्र लिख कर सरकार से मार्गदर्शन माँगा। जिसमे ये स्पष्ट अंकित किया है कि यदि सरकार निर्देश दे तो इस भर्ती को पूर्ण किया जा सकता है।

आंदोलनकारियों के नेता पंकज आचार्य व इंद्र जोशी  ने बताया कि इस प्रकरण पर किसी भी प्रकार की कोर्ट की रोक नहीं है। रोक सरकार ने लगाई है और वही इसे हटाने मे सक्षम है। ऐसा जवाब विभाग प्रत्येक बार देता रहा है। आंदोलनकारी इंद्र जोशी बताते हैं कि वर्ष 2013 में आमरण अनशन के दबाव से तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक वी. श्रवण कुमार ने सरकार से भर्ती के लिए मार्गदर्शन एवं अनुमति माँगी थी, लेकिन उस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हो पाई।

भाजपा सरकार के समय राजेन्द्र सिंह राठौड की अध्यक्षता में गठित मंत्रीमण्डलीय उपसमिति में चयनितों के पक्ष को सुना गया। बताते है कि सुनवाई के बाद ये माना गया कि ये एक बहुत बड़ी प्रशासनिक गलती है। इस प्रकरण में नियुक्ति के लिए सैद्धान्तिक सहमति देते हुए जिला परिषद से तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगवाई थी।

वर्ष 2003 में गहलोत सरकार ने जुलाई में  शिक्षा सचिव के माध्यम से आदेश भी जारी किये, लेकिन सरकार के आदेश आज भी फाइलों में दफन है। दिनेश आचार्य बताते है कि राज्य सरकार के पत्रांक एफ /13(244) प्रा.शि. वि./99 दिनांक 1/7/2003 को 250 पद के लिए वित्‍तीय स्वीकृति भी शासन सचिव विधि प्रकोष्ठ द्वारा दी जा चुकी है।

बहरहाल, मंत्री के बीकानेर आने पर एक आशा जगी थी, लेकिन अफसरों की गलत फीडिंग की वजह से ये मामला कितना आगे बढ़ता है ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

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