Thursday, July 18, 2024
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उच्‍च न्‍यायालय ने निलम्‍बन पर लगाई अंतरिम रोक, ‘‘अभियोजन स्वीकृति के कारण निलम्बित करना अनुचित’’

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बीकानेर Abhayindia.com राजस्थान उच्च न्यायालय की एकलपीठ के न्यायाधीश अरूण भंसाली ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रावतभाटा जिला चित्तौडगढ में चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यरत डा. त्रिलोक कुमार शर्मा की रिट याचिका को अंतरिम रूप से स्वीकार करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा उसके निलम्बन आदेश पर अंतरिम रूप से रोक लगा दी है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रावतभाटा में चिकित्सा अधिकारी डा. त्रिलोक कुमार शर्मा जब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डग जिला झालावाड में कार्यरत थे तब उनके विरूद्व 18.12.2018 को एक प्रथम सूचना रिपोर्ट भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 एव 12 तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120 बी में दर्ज करवाई गई। इसके बाद प्रार्थी का स्थानांतरण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रावत भाटा जिला चित्तौडगढ में कर दिया गया। 29.06.2022 को शासन उप सचिव कार्मिक विभाग द्वारा प्रार्थी के विरूद्व राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 13 के अंतर्गत निलम्बन आदेश पारित किया गया। इस निलम्बन आदेश में उप सचिव द्वारा यह स्‍पष्‍ट रूप से अंकित किया गया कि चूंकि उसके विरूद्व वर्ष 2018 मे दर्ज प्राथमिकी मे विभाग द्वारा 15.06.2022 को प्रार्थी के विरूद्व विभाग द्वारा अभियोजन स्वीकृति जारी कर दी गई है। इसलिए उसे निलंबित किया जाता है। निलम्बन काल में उसका मुख्यालय चित्तौडगढ से जयपुर किया जाता है। विभाग द्वारा प्रार्थी को निलम्बन आदेश 29. 06.2022 की सूचना भी 01.08.2022 को दी गई।

विभाग के इस कृत्य से व्यथित होकर प्रार्थी ने अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से अपने निलम्बन आदेश व इसकी सूचना का आदेश एक अगस्‍त को उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी। उच्च न्यायालय के समक्ष प्रार्थी के अधिवक्ता का प्रथमतया यह तर्क था कि केवल अभियोजन स्वीकृति जारी करने के आधार पर प्रार्थी को निलम्बित करना राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 13 के विरूद्व है। नियम 13 में यह स्‍पष्‍ट प्रावधान है कि यदि कार्मिक के विरूद्व कोई विभागीय जाचं हो या किसी कार्मिक के विरूद्व प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हुई हो व उसके तहत वह 48 घन्टे से ज्यादा समय तक जेल मे रहा हो तभी निलम्बित किया जा सकता है लेकिन वर्तमान प्रकरण में प्रार्थी के विरूद्व निलम्बन आदेश केवल इस कारण से जारी किया गया क्योंकि वर्ष 2018 में दर्ज प्रकरण में विभाग द्वारा 15.06.2022 को उसके विरूद्व अभियोजन स्वीकृति जारी की जा चुकी है दूसरा विभाग द्वारा उसका निलम्बन आदेश या 1 अगस्त 2022 के आदेश से उसे सूचित किया गया जो कि विभाग की उदासीन कार्य-शैली को दर्शाता है।

प्रार्थी के अधिवक्ता का न्यायालय के समक्ष यह तर्क था कि प्रार्थी को निलम्बित करके मुख्यालय जयपुर किया गया है वो भी विधि विरूद्व है। प्रार्थी के अधिवक्ता के तर्को से सहमत होते हुए उच्च न्यायालय की एकलपीठ के न्यायाधीश ने सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उप सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग व निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया व साथ ही अभियोजन स्वीकृति जारी करने के कारण प्रार्थी के निलम्बन आदेश व इसकी सूचना के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई।

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