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बीकानेर जिला परिषद चुनाव : त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे 41 वार्ड, RLP की दस्तक से बदले समीकरण, क्‍या टूटेगा- 25 साल का कांग्रेस का तिलिस्म

बीकानेर Abhayindia.com पंचायती राज चुनावों की सरगर्मियों के बीच बीकानेर जिला परिषद के 41 वार्डों से नामांकन दाखिले के साथ ही सियासी तस्वीर साफ हो गई है। जिला प्रमुख का पद सामान्य महिला आरक्षित होने के कारण भाजपा, कांग्रेस समेत आरएलपी ने अपने जिताऊ और प्रभावशाली चेहरों पर दांव लगाया है।

सियासी जानकारों के मुताबिक, बीकानेर के पंचायती राज चुनावों में बीते कई दशकों से भाजपा और कांग्रेस के बीच ही टक्कर रही है, लेकिन अबकी दफा आरएलपी की दस्तक से समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होगा।

जानकारी में रहे कि पिछले पंचायती राज चुनाव में बीकानेर जिला परिषद की कुल 29 सीटों में से कांग्रेस ने 21 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। इन चुनावों में कांग्रेस की कमान दिग्गज नेता स्व. रामेश्वर डूडी ने संभाल रखी थी। उनकी राजनीतिक समझ, संगठन पर पकड़ और जमीनी प्रभाव से कांग्रेस की मजबूत पकड़ रही। लेकिन, उनके देहावसान के बाद कांग्रेस में बिखराव नजर आ रहा है। स्व. डूडी के बाद कांग्रेस में वह एकजुटता और रणनीतिक पकड़ नहीं दिख रही।

इस बार बीकानेर जिला परिषद में 41 वार्ड हैं। नए परिसीमन के बाद जीत के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। इधर, आरएलपी भी अपना जोर दिखा रही है। दरअसल, बीकानेर जिला परिषद में पिछले 25 सालों से कांग्रेस का ही जिला प्रमुख रहा है। यह कांग्रेस के लिए गढ़ माना जाता है। ऐसे में इस बार केंद्रीय कानून राज्य मंत्री और बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल के साथ ही पूरी भाजपा कांग्रेस के इस तिलिस्म को तोड़ने में जुटी हुई है। भाजपा के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। जिला परिषद वार्डों के नए परिसीमन में इस बार भाजपा ने भी अपना समीकरण लगाया है। आरक्षित वार्डों में भाजपा ने नए चेहरों को मौका दिया है तो सामान्य वार्डों में अनुभवी लोगों को उतारा है।

बीकानेर में तीन दशक बाद पंचायती राज चुनावों में जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल सकता है। दरअसल, रामेश्वर डूडी का पंचायती राज चुनाव में एकछत्र दबदबा था, वे अब नहीं रहे। भाजपा में देवी सिंह भाटी के अलावा पूरे जिले में ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ वाला दूसरा कोई नेता नहीं है, मगर भाटी सक्रिय राजनीति से दूर हैं।अब कांग्रेस में रामेश्वर डूडी की जगह बिशनाराम सियाग और गोविंदराम मेघवाल अपनी पकड़ बना रहे हैं। दोनों के बीच गुटबाजी हावी होने से कांग्रेस में एकजुटता नजर नहीं आ रही है। इधर भाजपा में अर्जुनराम मेघवाल गुट हावी जरूर है, मगर गुट के पास प्रभावशाली नेताओं की कमी है जो गांवों की राजनीति को साध सके। -मुकेश पूनिया, सीनियर जर्नलिस्‍ट

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