बीकानेर Abhayindia.com कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे स्व. रामेश्वर डूडी के परिवार में “सियासी दरार” से पार्टी में हलचल मची हुई है। असल में, इस बार जिला परिषद के वार्ड 13 से डूडी परिवार की दो महिलाएं आमने-सामने मैदान में उतर आई हैं। इनमें एक तरफ स्व. रामेश्वर डूडी की पुत्रवधू निकिता चौधरी, जो कांग्रेस के अधिकृत सिंबल पर चुनाव लड़ रही हैं, तो दूसरी तरफ हैं उनकी सगी काकीसास रामेश्वरी डूडी, पत्नी भगवाना राम डूडी, जिन्होंने कांग्रेस और निर्दलीय दोनों रूपों में नामांकन दाखिल किया है। इससे डूडी परिवार में अंदरूनी खींचतान की खबरें सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही है। निकिता चौधरी को पार्टी का सिंबल मिला है। उनके समर्थन में स्व. डूडी के पुराने समर्थक खड़े बताए जा रहे हैं।
वहीं, रामेश्वरी डूडी की सियासी कमान भगवाना राम डूडी और उनके बेटे अतुल डूडी ने संभाल रखी है जो लंबे समय से परिवार और क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय है। यह मामला अब सियासी तूल पकड़ चुका है इसलिये कांग्रेस के नेता और डूडी परिवार के लोग खुलकर बोलने से बच रहे हैं। मामले को लेकर जिला कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह डूडी परिवार का आंतरिक मामला है, पार्टी इसमें ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।
विधानसभा चुनावों में पड़ी दरार, अब ज्यादा गहराई
पार्टी सूत्रों की मानें तो डूडी परिवार में यह दरार आज की नहीं है। इसकी जड़ें बीते विधानसभा चुनावों में ही पड़ गई थीं। उस समय स्व. रामेश्वर डूडी के बड़े भाई भगवाना राम डूडी खुद नोखा से विधानसभा चुनाव लडऩा चाहते थे, उनकी दावेदारी मजबूत थी। वे लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय थे। लेकिन, पार्टी के बड़े नेताओं और परिवार के लोगों की समझाइश पर उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए। उनकी जगह स्व. रामेश्वर डूडी की धर्मपत्नी सुशीला डूडी को मैदान में उतारा गया। सुशीला डूडी ने चुनाव जीता और आज नोखा की विधायक हैं। उस समय तो मामला आपसी सहमति से शांत हो गया, लेकिन अंदर ही अंदर खींचतान चलती रही जो अब खुलकर सामने आ गई है।
अचानक बदल गई कहानी
पंचायत चुनावों में तय हुआ था कि भगवाना राम डूडी की पत्नि रामेश्वरी डूडी को कांग्रेस की ओर से वार्ड नंबर 13 से टिकट दिया जाएगा और वे जिला प्रमुख की प्रबल दावेदार होंगी। लेकिन नामांकन के अंतिम दिन मंगलवार को अचानक बदले घटनाक्रम में कांग्रेस की ओर से पार्टी सिंबल के साथ निकिता चौधरी का नाम सामने आ गया। उन्होंने नामांकन दाखिल कर दिया। इससे भगवाना राम डूडी खेमे में हलचल सी मच गई। इसके बाद रामेश्वरी डूडी ने भी दो नामांकन दाखिल किए। एक कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में और दूसरा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में।
प्रदेश की सियासत में प्रभावशाली है डूडी परिवार
जानकारी में रहे कि कांग्रेस के कद्दाव नेता स्व. रामेश्वर डूडी नोखा ही नहीं, पूरे प्रदेश राजनीति का बड़ा नाम थे। वे किसान नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष, पूर्व मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश के सबसे मजबूत नेताओं में से एक थे। उनकी छवि एक जमीनी नेता की थी, जो किसानों और आम लोगों के बीच लोकप्रिय थे। उनके निधन के बाद उनकी विरासत को उनकी पत्नी सुशीला डूडी संभाल रही हैं। वे विधायक हैं। -मुकेश पूनिया, सीनियर जर्नलिस्ट






















