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बीकानेर नगर निगम चुनाव : प्रचार का शोर थमा, अब डोर-टू-डोर पर जोर; 40 से ज्यादा बागियों पर कार्रवाई को लेकर सस्पेंस बरकरार

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बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर नगर निगम के 9 सितंबर को होने वाले मतदान के लिए प्रचार का शोर सोमवार शाम 5 बजे थम गया। 4 सितंबर से चल रहा धुआंधार प्रचार अभियान खत्म होते ही ढोल-नगाड़े, बाइक रैलियां और लाउडस्पीकरों का शोर शांत हो गया। अब प्रत्याशी घर-घर जाकर मतदाताओं से अपने पक्ष में मतदान की अपील कर रहे हैं।

बागियों पर एक्शन का इंतजार,
दोनों पार्टियां बैकफुट पर

चुनाव में सबसे बड़ा सिरदर्द बने हैं बागी। भाजपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में 40 से ज्यादा बागी मैदान में डटे हुए हैं, लेकिन अभी तक किसी पर भी कार्रवाई नहीं हुई है।
गौरतलब है कि नामांकन वापसी के दौरान दोनों ही दलों ने सख्त तेवर दिखाते हुए ऐलान किया था कि जो बागी मैदान से नहीं हटेगा, उसे 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया जाएगा। लेकिन प्रचार थमने और मतदान करीब आने के बावजूद कार्रवाई न होने से पार्टी के अंदर ही सवाल उठने लगे हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, अभी समझाइश का दौर चल रहा है। प्रदेश से लेकर जिला स्तर के नेता बागियों को मना कर अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में लाने की कोशिश कर रहे हैं। जिला इकाइयों को निर्देश हैं कि पहले मनाया जाए, नहीं मानने पर ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

क्यों नरम है पार्टियां? बोर्ड
की राजनीति है वजह

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो बागियों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के नरम रुख के पीछे सिर्फ समझाइश ही नहीं, बल्कि बोर्ड बनाने की रणनीति भी है।

निकाय चुनाव में अगर किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षद किंगमेकर बन जाते हैं। पार्टियों को उम्मीद है कि टिकट से नाराज होकर निर्दलीय लड़े कई नेता जीतने के बाद वापस पार्टी के साथ आ सकते हैं और बोर्ड बनाने में मददगार साबित होंगे। ऐसे में चुनाव से पहले उन्हें 6 साल के लिए बाहर करने से पार्टी अपनी भविष्य की संभावनाएं कमजोर नहीं करना चाहती। यही वजह है कि फिलहाल एक्शन से ज्यादा समझाइश पर जोर है।

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