







प्रिय अभिभावकों एवं साथियों, आज 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस है। क्या आप जानते हैं? आज ही के दिन सन् 1897 में सर रोनाल्ड रॉस ने यह खोज की थी कि मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से मलेरिया होता है। उनकी इसी खोज के सम्मान में हर साल यह दिन मनाया जाता है। एक बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में मैं अपने ओ.पी.डी. में देखता हूँ कि मानसून और बारिश के बाद बच्चों में बुखार, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। मच्छर छोटा है, पर उससे होने वाली बीमारी पूरे परिवार को परेशान कर देती है।
मच्छर से बचाव के 5 जरूरी नियम
1. पानी जमा न होने दें – कूलर, गमले, टायर, छत पर हर हफ्ते जमा पानी खाली करें। मच्छर साफ पानी में ही पनपते हैं।
2. घर को सुरक्षित रखें – खिड़की-दरवाजों पर जाली लगवाएं। शाम होते ही दरवाजे बंद करें।
3. बचाव जरूर करें – रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। बच्चों को पूरे कपड़े पहनाएं। मच्छर भगाने वाली क्रीम/लोशन लगाएं।
4. लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें – यदि 2 दिन से ज्यादा बुखार, शरीर दर्द, उल्टी या चकत्ते हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। खुद से दवा न लें।
5. जागरूकता फैलाएं – अपने आस-पड़ोस को भी साफ रखने के लिए प्रेरित करें।
याद रखें...
“रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाज है” मलेरिया और डेंगू का कोई स्थायी इलाज नहीं, पर बचाव 100% संभव है। आइए, इस विश्व मच्छर दिवस पर हम सब मिलकर संकल्प लें- “मच्छर मुक्त घर, स्वस्थ परिवार।” क्योंकि, एक स्वस्थ बच्चा ही स्वस्थ समाज की नींव है। -डॉ. श्याम अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ, बीकानेर







