‘टोप टेन’

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आखी दुनिया मांय आजकाल ‘टोप टेन’ रौ चाळौ चाल पड़्यौ है। आयै दिन अखबारां में कणैई दुनिया रा नामी-गिरामी ‘टोप टेन’ तौ कणैई जगत-सेठां री ‘टोप टेन’ सूची। कणैई सिनिमा सितारां री, तौ कणैई ‘बेस्ट’ सिने-ताड़कावां री ‘टोप टेन’ लिस्ट। पैलै, दूजै अर तीजै नंबर रौ झौड़-झपाड़ तौ अबार चालै ई पण अबै दसवौं नंबर कबाड़्यां ई आदमी रौ नांवकौ कायम रैय सकै।
बरसां पैली फगत दसवीं-बारवीं रै ‘रिजल्ट’ री बगत दसेक पढाकां री ‘मैरिट लिस्ट’ बण्या करती ही, पण अबै तौ आ लिस्ट ई द्रौपदी रै चीर ज्यूं लांबी बधण लागगी है। होड अैड़ी मची है कै दसवैं पायदान माथै पूगतां-पूगतां ई तीस-बत्तीसां रा नांव दियां ई ‘टोप टेन’ वाळौ खेलौ नीठ पार पड़ै। पण समै री मांग है कै पढाकां, खेलाड़्यां, राजनेतावां अर धन्ना सेठां री भांत दुनिया रा दस टोप चोर-उचक्का, जुआरियां-सटोरियां, नसेड़्यां-भंगेड़्यां, लंपट-लूंगाड़ां, गुंडा-मवाल्यां अर रुळपट-रुळियारां री ‘टोप टेन’ सूची ई जारी होवणी चाहीजै, जिणसूं दुनिया में वांरौ ई नांवकौ बण्यौ रैवै। बियां तौ अै काम ई नामून काढण रौ ई करै।
इणी भांत दुनिया रै कवियां-लेखकां अर कलाकारां री ‘टोप टेन’ सूची बणणी ई हाल बाकी है। पण इण काम में जोखम घणी है, क्यूंकै म्हारी बिरादरी रा लोग अणूंता संवेदणसील है। आंनैं दूजौ पायदान ई मंजूर कोनीं। म्हांनैं घडग़ी जकी तौ बाड़ में बडग़ी। म्हांरी कलम सूं कढ्योड़ी तौ हरेक रचना काळजयी है। इण वास्तै म्हारी बिरादरी रै नांवकै री आपनैं चिंता करण री जरूरत कोनीं। म्हांरौ नांवकौ तौ बिना ‘टोप टेन’ सूची रै ई बण्यौ रैसी। काल दिनूगै-दिनूगै ई म्हारी लेखक बिरादरी रौ अेक भायलौ घरै आयग्यौ। बोल्यौ, ”पैली तौ अेक कप चाय पाव, पछै थनैं बधाई देऊं!’
म्हैं कैयौ, ”अबै थूं आयौ ई चाय पीवण नैं है, तौ वा म्हैं बिना बधाई दियां ई पाय देसू, पण बात कांईं है, जकी तौ बता बाळ!’
वौ म्हारै माथै गुमेज करतौ थकौ बोल्यौ कै ‘साहित्य पुरस्कार’ सारू थारी पोथी ‘जुगाड़’ रौ नांव दस टाळवीं पोथ्यां सारू आयौ है। म्हा कनैं राजस्थानी साहित्य संस्थान रौ कागद आयौ है, जिणमें लिख्यौ है कै आं मांय सूं आपरी दीठ में जकी तीन पोथ्यां तगड़ी है, उणां रौ नांव सिरैपांत सूं लिख’र भिजावौ।’
म्हैं पूछ्यौ, ”थूं कठैई म्हारी पोथी रौ नांव तौ वां तीनां में नीं भेज दियौ है?’
वौ बोल्यौ, ”मजाक करै है कांईं? थारी पोथी रौ नांव तौ सिरैपोत में ई भेज्यौ है। बाकी दो पोथ्यां रा नांव तौ इयां ई अटकाय दिया। साची पूछै तौ वै पोथ्यां तौ म्हारै निजरां ई कोनीं देख्योड़ी।’
म्हैं पूछ्यौ, ”पण म्हारी पोथी तौ थारै पढ्योड़ी होवैला।’
वौ लजखाणौ पड़तौ बोल्यौ, ‘भाइड़ा पढी तौ कोनीं, पण घरै पड़ी जरूर है। थूं इज तौ म्हनैं ‘घणै मान सूं भेंट’ लिखनै दी ही। पण म्हैं सोच्यौ, थारै लिख्योड़ी है, जणै ठीक ई होवैला।’
”ठीक रौ तौ थनैं कांईं ठाह? अर दस मांय सूं तीन तगड़ी पोथ्यां री तौ तनैं ताय ई ठाह कोनीं। पछै थूं कोई वैमाता तौ है कोनीं जकौ थारै टाळ्योड़ी पोथ्यां नैं साहित्य संस्थान लोह री लीक मान लेसी। म्हारी पोथी ‘जुगाड़’ तौ लारलै तीन सालां सूं ‘टोप टेन’ में चालै, पण राजस्थानी में ओ ‘टोप टेन’ वाळौ टूणौ चालै कोनीं। अठै तौ देसी टोटका ई चालै। हां, जे कोई अंगरेजी पुरस्कार होवतौ तौ ‘जुगाड़’ जरूर बैठ जावतौ।
वौ बोल्यौ, ”क्यूं फालतू री सेखी बघारै। थनैं कांईं ठाह के थारी पोथी लारलै तीन सालां सूं ‘टोप टेन’ में चालै?’
म्हैं कैयौ, ”इणमें सेखी बघारण री कांई बात है बेटी रा बाप! आखै साहित्य जगत मांय थूं अेकलौ इज तौ अैड़ौ भोमियौ है कोनीं जकौ बिना ‘आखा’ लियां ई बताय देवै के ‘टोप टेन’ पोथ्यां किसी है। थारै जैड़ा अकल रा उजागर और घणा ई है, जका बिना पोथ्यां पढ्यां ई साहित्य संस्थान सूं ‘टोप टेन’ री फेहरिस्त मिल्यां कम सूं कम तीन टाळवीं पोथ्यां रा नांव तौ लिख’र भिजवाय सकै है। म्हारी जाण में तौ साहित्य संस्थान सरुआती दौड़ मांय पुरस्कार री होड सूं टाळण सारू ईज आं टाळवीं पोथ्यां रा नांव मांगै। जे आपांरी विद्वता माथै ई साहित्य संस्थान नैं भरोसौ होवै तौ वौ पोथ्यां री फेहरिस्त भेजण रौ फोड़ौ ई क्यूं देखै?’
”थूं तौ हरेक बात नैं मजाक में लेवै यार!’ कैवतौ थकौ वौ सीरियस होयग्यौ।
”लै आ चाय आयगी, चाय पी! जे थारी बात नैं म्हैं मजाक में लेवतौ तौ घर में चाय रौ कैवतौ कांईं? बारै थड़ी माथै जायनै ई पी लेवता। खैर छोड, म्हनैं इण ‘टोप टेन’ में कोई रुचि कोनीं। साची पूछै तौ राजस्थानी में ‘टोप टेन’ चालै ई कोनीं, क्यूंकै राजस्थानी में दस पोथ्यां री फेहरिस्त बणावण में ई साहित्य संस्थान नैं झोबा आयग्या होवैला। जे तीन कै पांच बरसां रै नियमां रै हिसाब सूं चालां तौ पैली बात तौ आपणी मातभासा में तौ कविता नैं टाळ उपन्यास, कहाणी, संस्मरण, निबंध, रेखाचितराम कै दूजी किणी विधा री ‘टोप टेन’ पोथ्यां टाळीजै ई कोनीं। जे दौरी-सौरी पार ई पड़ जावै अर भावै जोग सूं किणी लेखक नैं पुरस्कार मिळ जावै तौ वौ तौ ‘टोप टेन’ री भांत ‘दूसरै दसक’ तांईं पाछी कोई पोथी लिखण रौ जोखौ ई मोल नीं लेवै, छपावण री बात तौ पछै आवै।’
म्हारौ औ प्रवचन सुण्यां पछै म्हारै भायलै रौ पारौ कीं हेठै उतर्यौ अर वौ कीं अणमणौ होयनै बोल्यौ, ”जणै थारी निजरां मांय आ कोई बधाई री बात कोनी?’
म्हैं उणनैं थावस बंधायौ, ”बात तौ बधाई री है ई, इण मिस राजस्थानी साहित्त जगत रै बिरमांड में आपां दोनां रौ नांव तौ नखतर है। ज्यूंकै- थारौ निरणायकां री ‘टोप टेन’ सूची में अर म्हारौ पुरस्कार लायक पोथी री ‘टोप टेन’ सूची में। पण आ बात हरेक नैं नीं बतावणी अर आपरै आदमी नैं तौ भूल’र ई नीं बतावणी, क्यूंकै इयां पोत चौड़ै आयां पछै आपां रौ समीक्षकां री ‘टोप टेन’ लिस्ट सूं नांव कट सकै है। अेक टुचकलौ सुण, किणी गांव में जांन गई। रात रा दो जानियां नैं टाळ सगळा सूत्या हा। वै दोनूं आपस में बंतळ करै हा। अेक बोल्यौ- ‘आखै मारवाड़ में कै तौ थारी गवाड़ी तगड़ी है अर कै म्हारी’ जितरैक अेक जांनियौ, जकौ अेक खूणै में जागतौ घोरावै हौ, वौ खंखारौ कर्यौ। जणै पैलड़ौ जांनी बात नैं संवारतौ थकौ बोल्यौ- ‘अेक गवाड़ी इणरी भी तगड़ी है।’ इण भांत दो री ठौड़ तीन गवाडिय़ां तगड़ी करणी पड़ी। आपां नैं खाली आपणी गवाड़ी तगड़ी राखणी है। ज्यूंकै साहित्य संस्थान आपरौ सगळौ काम ‘सीक्रेट’ राखै। वौ तौ पुरस्कार घोसणा सूं पैलां तक इण बात रौ भणकारौ ई नीं लागण देवै कै ‘टोप टेन’ मांय सूं ई तीन टाळवीं पोथ्यां किसी ही। पुरस्कार वां तीनां मांय सूं किणी नैं मिळ्यौ है के ‘टोप टेन’ री टोळी सूं टळ्योड़ी किणी पोथी नैं!’
म्हारी बात सुणनै भायलौ फेरूं उदास होयग्यौ। वौ बोल्यौ, ”जणै तौ इण ‘टोप टेन’ वाळै अडंग़ै नैं बंद ई कर देवणौ चाहीजै।’
म्हैं कैयौ, ”रेडियौ माथै फिल्मी गाणां सारू चालू कर्योड़ौ ‘बिनाका टोप टेन’ वाळौ औ रोळौ अबै बिना आंदोलण बंद कोनीं होवै। अबै तौ खेल, राजनीति, साहित्य, सिनिमा, उद्योग अर दूजा मोकळा खेतरां मांय ‘टोप टेन’ धूम है। अबार ‘कॉमनवेल्थ गेम्स’ मांय आपणै राजस्थान रौ अेक साईकलिस्ट प्रतियोगिता मांय दसवैं नंबर माथै आयौ, मतळब कै ‘टोप टेन’ मांय। पछै ठा पड़्यौ कै कुल प्रतियोगी ई इग्यारै हा। म्हारी जाण में तौ इग्यारवैं नंबर माथै आवणियौ साईकलिस्ट ई राजस्थानी रौ ईज हुवैला। आपणै राजस्थान री सड़कां रा खाडा-खोचरां रै हिसाब सूं रास्ट्रमंडल कै ओलंपिक खेलां में साईकलिस्टां री कोई ‘बाधा दौड़’ प्रतियोगिता हुवै तौ राजस्थान रा साईकलिस्ट पक्कांयत स्वर्ण, रजत अर कांस्य, तीनूं तमगा आपरै गळै में घलवाय सकै।’
म्हारी आ बात सुणनै भायलै रै मूंढै माथै माडांणी मुळक आयगी। वौ बोल्यौ, ”म्हारी समझ में नीं आवै कै दुनिया-भर में ‘टोप टेन’ री सूची फिल्मी हस्तियां, अमीर घराणां, मानीजता मिनखां अर राजनीति रा खेलाडिय़ां री ई क्यूं बणै, कदैई कवि-लेखकां री ‘टोप टेन’ सूची क्यूं नीं बणै?’
म्हैं कैयौ, ”गरीब-गुरबां री भी कदैई सूची बण्या करै है कांईं? जे दुनियां रै सगळां सूं बेसी दस गीबां री सूची बणावण रौ काम पोळाईजै तौ सगळा देस रळनै ई औ काम पार नीं घाल सकै। ‘टोप टेन’ री बात तौ दूर, अजै तौ गरीबी रेखा सूं नीचै जूण भुगतणियां री सूची ई आधी-अधूरी है। जे करोड़ां-अरबां रिपिया खरच करनै गरीबां री ‘टोप टेन’ लिस्ट जारी ई करीज जावै तौ उणसूं बटणौ कांईं है? गरीब तौ गरीब ई रैवैला। अेक टुचकलौ औरूं याद आयग्यौ। इस्कूल में मास्टरजी अेक छोरै नैं ‘ब्लैक बोर्ड’ माथै ‘गरीब’ लिखण रौ कैयौ। मात्रा रै मायाजाळ सूं अजाण छोरै चॉक सूं गरीब री ठौड़ ‘गरिब’ लिख दियौ। मास्टर बोल्यौ- ‘अरे मूरख! इण बापड़ै गरीब कनैं आ अेक ‘ई’ री मात्रा ईज तौ बडी है अर उणनैं ई थूं छोटी करदी। कांणी री आंख रौ काजळ ई थनैं सुहायौ कोनीं।’ कैवण रौ मतळब, गरीब तौ औरूं गरीब होवतौ जाय रैयौ है, पछै उणरी ‘टोप टेन’ सूची जारी करण सारू कुण म्हारौ बाप ठालौ बैठ्यौ है?’
म्हारी बात सुणनै भायलौ मित्र म्हासूं जावण री इजाजत मांगी, पण उठण सूं पैली बोल्यौ, ”चायै कीं होवौ, म्हैं भारत सरकार सूं आ मांग जरूर करूंला के वा लूंठौ सर्वे करायनै देस रै सगळां सूं बेसी दस गरीब-परिवारां री ‘टोप टेन’सूची जारी करै अर लोकसभा रै ‘सून्यकाल’ मांय उण माथै चरचा करावै।

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