‘गाय को कष्ट देने वाला सबसे बड़ा भ्रष्ट होता है’

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विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य स्वामी चित्प्रकाशांनद गिरी महाराज से बातचीत करते अभय इंडिया के संपादक सुरेश बोड़ा।
विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य स्वामी चित्प्रकाशांनद गिरी महाराज से बातचीत करते अभय इंडिया के संपादक सुरेश बोड़ा।

बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। गाय को दुहने (दूध निकालने) के बाद उसे लावारिस हालत में छोड़ देने वाले लोग सबसे भ्रष्ट होते हैं। गाय माता को कष्ट देने वाले ऐसे लोगों का सामाजिक रूप से बहिष्कार होना चाहिए। गाय का रक्षा करने की जिम्मेदारी केवल सरकारों की ही नहीं है, बल्कि हमारे समाज को इसके प्रति ईमानदार होने की जरूरत है।

श्रीअग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ में कथावाचन करते स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरी महाराज।
श्रीअग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ में कथावाचन करते स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरी महाराज।

यह बात वृंदावन वाले महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरी महाराज ने गुरुवार को ‘अभय इंडिया’ से विशेष बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि देश की धर्म-संस्कृति गाय, गीता, गायत्री और गंगा से ही बच सकती है। इनका अनादर करके हम खुद का ही अनर्थ कर रहे हैं। गाय के संबंध में केन्द्र की वर्तमान सरकार के रवैये को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह सरकार पिछली यूपीए सरकार से लाख गुना बेहतर है। वृंदावन (उत्तरप्रदेश) में भाजपा की योगी सरकार आने के बाद गायों पर जुल्म काफी हद तक कम हो गया है। पिछली सरकार के दौरान गायों की चोरी और उन पर अत्याचार की घटनाएं बहुत होती थी, उसमें अब कमी आई है।

उन्होंने कहा कि फिर भी गायों को बचाने की जिम्मेदारी अकेली सरकार पर नहीं डाल सकते, इसके लिए हमें स्वयं आगे आने होगा। यह व्यक्ति को संकल्प लेना होगा कि वो प्रति दिन गायों के लिए अपनी आजीविका में से कुछ न कुछ अंश गायों को दें। गाय का दूध तो हमारे लिए लाभप्रद है ही, साथ ही उसका मूत्र, गोबर भी मानव जीवन के लिए बहुत कल्याणकारी है। इसका समुचित उपयोग होगा तो हमें इसकी उपयोगिता का पता चल सकेगा।

कश्मीर के बदतर हालात के लिए नेहरू की सत्ता लोलुपता दोषी

एक अन्य सवाल के जवाब में स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरी ने कहा कि कश्मीर में वर्तमान में जो बदतर हालात नजर आ रहे हैं, इसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सत्ता लालुपता दोषी रही है। उनकी गलत नीतियों के कारण ही जम्मू-कश्मीर में अलग कानून चलता है। धारा 35 और 370 के मुद्दों को लेकर उन्होंने कहा कि इन्हें हटाना इतना आसान नहीं है, जितना आम-अवाम सोचता है। इसके लिए भी नेहरू की नीतियां ही जिम्मेदार है। फिर भी इसके रास्ते निकालने के लिए देश के कर्णधार पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।

संगठनों के माध्यम से जन जागरण

स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरी महाराज विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की वैचारिक समिति, अखिल भारतीय संत समिति, आचार्य महासभा, व्रत संन्यासी परिषद सरीखे संगठनों में सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि इन संगठनों के माध्यम से वे देश की धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए जन जागरण कर रहे हैं।

बीकानेर में जग रही अलख

स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरी यहां इन दिनों यहां गोगागेट स्थित श्रीअग्रसेन भवन में गौ सेवार्थ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में भी गाय को बचाने का आह्वान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं बीकानेर सबसे पहले वर्ष 2003 में आया था। यहां के लोग गाय माता की रक्षा के प्रति काफी हद तक संवेदनशील है। गायों की रक्षार्थ हो रहे इस कथा यज्ञ में भी लोग उत्साह से भागीदारी निभाते हुए तन, मन और धन से सहयोग कर रहे हैं।

12 जून तक होगा आयोजन

श्रीअग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ का आयोजन बीते सोमवार से शुरू हुआ, जो 12 जून तक होगा। स्व. मोहिनी देवी धर्मपत्नी बालकिशन अग्रवाल की स्मृति में आयोजित हो रहे इस कथा यज्ञ के मुख्य यजमान बाबूलाल अग्रवाल है। आयोजन और गौशाला से जुड़े गौसेवी श्रीभगवान अग्रवाल, माणकचंद चौधरी, रमेश कुमार अग्रवाल (कालू) ने बताया कि स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरी के आह्वान पर कथा यज्ञ के दौरान बड़ी संख्या में गौसेवी सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं। आयोजन को सफल बनाने के लिए बाबूलाल अग्रवाल, बनवारीलाल, गौरीशंकर, माणकचंद चौधरी, राजाराम, चंद्रेश कुमार, पवन कुमार, रामचंद्र, बुलाकीदास सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे हुए हैं।