संपत्ति का विवरण नहीं देने वाले अफसरों को आखिरी अल्टीमेटम!

जयपुर (अभय इंडिया न्यूज)। प्रदेश के करीब 25 हजर राजपत्रित अधिकारियों ने अभी तक अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा सरकार को नहीं दिया है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ अब सरकार सख्त कदम उठा सकती है। राज्य सरकार की ओर से ऐसे राजपत्रित अधिकारियों को अचल सम्पति का विवरण अपलोड करने का अन्तिम अवसर दिया गया है। अब राजपत्रित अधिकारी 31 मई 2018 तक अपनी अचल सम्पति का विवरण ऑन-लाइन अपलोड कर सकते है। उक्त तिथि तक अचल संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं करने वाले राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार के 84 हजार 945 राजपत्रित अधिकारियों द्वारा अब तक अचल सम्पत्ति का विवरण अपलोड किया जा चुका हैं, जबकि करीब 25 हजार राजपत्रित अधिकारियों ने अपना अचल सम्पत्ति का विवरण अभी तक अपलोड नहीं किया है। प्रदेश के राजपत्रित अधिकारियों द्वारा उक्त अवधि तक अचल सम्पत्ति का विवरण ऑनलाइन अपलोड नहीं करने पर कार्मिक विभाग द्वारा जारी परिपत्र 27 दिसम्बर, 2017 के अनुसार विजिलेंस क्लीयरेंस, पदोन्नति, एक जुलाई से देय वेतन वृद्धि व अन्य लाभ स्वीकृत नहीं किए जायेंगे।

एलपीजी के दुरुपयोग लगे प्रभावी रोक

जयपुर। प्रदेश में आमजन की सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सोमवार को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के अवैध भण्डारण एवं अन्तरण पर निर्बन्धन के प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में जारी निर्देश में विभाग की शासन सचिव मुग्धा सिन्हा ने कहा है कि प्रदेश के सभी जिला रसद अधिकारी व विभाग के संबंधित अधिकारी स्वायत शासन विभाग की सहभागिता के माध्यम से अपने अधिकारिता क्षेत्रों के विवाह स्थलों, सामुदायिक केन्द्रों एवं क्षेत्रधिकार में आने वाले ऐसे समस्त स्थानों जहां पर (घरेलू अथवा व्यवसायिक) गैस का उपयोग होता है, में होने वाले समारोह/गतिविधियों के दौरान गैस के दुरूपयोग, एक सिलेण्डर से दूसरे सिलेण्डर में गैस अन्तरण व भण्डारण संबंधी नियमों की पालना सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में अवैध रूप से घरेलू गैस सिलेण्डरों से व्यवसायिक गैस सिलेण्डरों/वाहनों में अनाधिकृत एलपीजी रिफलिंग के प्रकरण सामने आ रहे हैं, जो कि भयंकर दुर्घटना का रूप लेकर जान-माल के क्षति का कारण बनते हैं। सिन्हा ने बताया कि बिना समूचित प्राधिकार के एलपीजी का अंतरण द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (प्रदाय और वितरण विनियमन) आदेश, 2000 के अनुच्छेद संख्या (4) (6) (7) एवं सपठित अनुच्छेद (13) के अन्तर्गत अवैधानिक एवं प्रतिबन्धित है। उक्त आदेश की अवेहलना आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत दण्डनीय अपराध है और इस संबंध में विभाग की ओर से जिला रसद अधिकारी एवं संबंधित ऑयल कम्पनियों द्वारा संयुक्त रूप से जांच कर अवैध रिफलिंग के विरूद्ध नियमित सतर्कता कार्यवाही करने के निर्देश जारी किए जाते रहे हैं तथापि उक्त गतिविधियों पर पूर्ण रोक नहीं लग पाई है।