सुप्रीम कोर्ट : अयोध्या से आधार तक, 2 अक्टूबर से पहले आएंगे ये अहम् फैसले

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा।

नई दिल्ली। बीते दो दशकों में सबसे अधिक संवैधानिक पीठों का प्रतिनिधित्व करने वाले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा दो अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में इससे पहले कई अहम् मामलों के फैसले जल्द आ सकते हैं, जिनमें राम-जन्म भूमि मामला, सबरीमाला मंदिर मामला, आधार नंबर और दागी नेताओं के चुनाव लडऩे पर बैन का मामला आदि शामिल हैं। इनमें से कई मामलों की सुनवाई पूरी भी हो चुकी है और कभी भी फैसले आ सकते हैं। यहां जानते हैं ऐसे ही मामलों के बारे में, जिन पर सीजेआइ को फैसला देना है।

आधार कार्ड : निजता को मौलिक अधिकार बताने का फैसला आने के बाद अब इस बारे में फैसला आएगा कि क्या आधार कार्ड के लिए लिया जाने वाला डाटा निजता का उल्लंघन है या नहीं? फैसला आने तक सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के अलावा बाकी सभी केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं में आधार की अनिवार्यता पर रोक लगाई गई है। इनमें मोबाइल सिम व बैंक खाते भी शामिल हैं। बता दें कि इस मामले की सुनवाई 38 दिनों तक चली।

अयोध्या मामला : अयोध्या का राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अयोध्या केस से संबंधित एक पहलू को संवैधानिक बेंच भेजा जाए या नहीं, इस पर 28 सितंबर को फैसला आ सकता है। शीर्ष अदालत इस पर फैसला सुना सकता है कि मस्जिद में नमाज पढऩा इस्लाम का आंतरिक हिस्सा है या नहीं। अयोध्या की जमीन किसकी है, इस पर अभी सुनवाई की जानी है।

पदोन्नति में आरक्षण : शीर्ष अदालत यह फैसला देगी कि 2006 एम नागराज बनाम भारत सरकार मामले में संविधान पीठ के दिए हुए फैसले को पुनर्विचार करने की आवश्यकता है या नहीं, यानी इस पर बड़ी पीठ को फिर से विचार करने की जरूरत है या नहीं। नागराज मामले पांच जजों की ही एक संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) वर्गों को संविधान के अनुच्छेद 16 (4) और 16 (4ख) के अंतर्गत आरक्षण दिया जा सकता है, पर इसके लिए किसी भी सरकार को कुछ मानदंडों को पूरा करना होगा।

व्याभिचार का मामला : यदि कोई विवाहित पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ उसकी सहमति से संबंध बनाता है, तो संबंध बनाने वाले पुरुष के खिलाफ महिला का पति व्याभिचार का केस दर्ज करा सकता है। मगर, संबंध बनाने वाली महिला के खिलाफ मामला नहीं बनता। यह नियम भेदभाव वाला है या नहीं, इस पर फैसला आएगा।

सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग : सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि कोर्ट कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और सीधा प्रसारण होना चाहिए या नहीं। 24 अगस्त को राष्ट्रीय महत्व के मामलों में अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।

दागियों का मामला : शीर्ष अदालत इस बात को तय करेगा कि जिन नेताओं के खिलाफ गंभीर मामले में आरोप तय हो गए हैं, उनके चुनाव लडऩे पर रोक लगाई जाए या नहीं? 5 जजों के संविधान पीठ ने केंद्र से पूछा था कि क्या चुनाव आयोग को ये शक्ति दी जा सकती है कि वो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को चुनाव में उतारें तो उसे उस उम्मीदवार को चुनाव चिह्न देने से इनकार कर दे?

सबरीमाला में प्रवेश : केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर लगी उम्र संबंधी पाबंदियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। अगस्त में सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के खिलाफ याचिका पर संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

नेताओं की प्रैक्टिस : नेताओं के बतौर वकील प्रैक्टिस करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है, फैसला इसी महीने आएगा। सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने इस मामले में कोर्ट में याचिका लगाई थी।