दुर्लभ सिक्कों का खजाना देख कर दंग रह गए सभी

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बीकानेर के सुदर्शना कला दीर्घा में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन करते कलक्टर अनिल गुप्ता, न्यास अध्यक्ष महावीर रांका व अन्य।
बीकानेर के सुदर्शना कला दीर्घा में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन करते कलक्टर अनिल गुप्ता, न्यास अध्यक्ष महावीर रांका व अन्य।

बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। बीकानेर नगर के 531वें स्थापना दिवस के अवसर पर पांच दिवसीय महोत्सव की शुरूआत शनिवार को अनूठे एवं दुर्लभ सिक्कों की तीन दिवसीय प्रदर्शनी से हुई। प्रदर्शन में ब्रिटिश काल से लेकर अब तक के संकलित दुर्लभ सिक्कों को देख कर हर कोई अभिभूत हो गया। जिला प्रशासन, नगर विकास न्यास तथा राव बीकाजी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सुदर्शना कला दीर्घा में आयोजित प्रदर्शनी का शुभारम्भ जिला कलक्टर अनिल गुप्ता, नगर विकास न्यास अध्यक्ष महावीर रांका, न्यास सचिव आर. के. जायसवाल, सहीराम दुसाद ने किया।

प्रदर्शनी में ब्रिटिश काल, स्वतंत्रता के बाद तथा डेसीमल प्रणाली लागू होने से पहले के सिक्के, स्मारक सिक्के, 1957 से अब तक के हर सिक्के, लगभग 40 देशों के सिक्के व नोट, स्वतंत्र भारत से पूर्व के नोट, अब तक के समस्त वित्त सचिवों के हस्ताक्षर के एक रुपये तथा रिजर्व बैंक के समस्त गवर्नर्स के 2 रुपये से 2 हजार तक के नोट, फैन्सी नोट, गांधी सीरिज, 786 सीरिज के नोट को भरपूर सराहना मिली।

इस अवसर पर जिला कलक्टर ने सेवानिवृत बैंक अधिकारी भारत भूषण गुप्ता के सिक्कों, नोट, डाक टिकटों, कोर्ट स्टाम्प आदि के संग्रह को अतुलनीय बताया। उन्होंने कहा कि इस संकलन में हमारी समृद्ध सभ्यता एवं संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। नगर विकास न्यास अध्यक्ष महावीर रांका ने कहा कि इसमें मुगलकालीन, रियासतकालीन से लेकर वर्तमान में प्रचलित सिक्कों, नोट और डाक टिकटों का संकलन किया गया है। यह प्रदर्शनी युवाओं के लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होगी। न्यास सचिव आर. के. जायसवाल ने कहा कि प्रदर्शनी में संकलित वस्तुओं को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इससे आमजन भी इनके महत्व को समझ सकते हैं। प्रदर्शनी संयोजक अजीज भुट्टा ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा प्रदर्शनी के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन संजय पुरोहित ने किया। संकलनकर्ता भारत भूषण गुप्ता ने कहा कि वे गत 50 वर्षों से दुर्लभ सिक्कों, डाक टिकटों आदि का संकलन कर रहे हैं। अब तक शहर के लगभग प्रत्येक स्कूल में प्रदर्शनी लगा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि बच्चे हमारे ऐतिहासिक संदर्भों के बारे में जानकारी प्राप्त करें। प्रदर्शनी में गुप्ता द्वारा ओलम्पिक, एशियाड, पक्षियों, वन्य जीवों सहित विभिन्न थीम पर जारी डाक टिकट भी आमजन के अवलोकनार्थ रखे गए हैं।

प्रदर्शनी में संकलित वस्तुओं को देख हुए अभिभूत

प्रदर्शनी में बीकानेर स्टेट के तात्कालिक महाराजा गजसिंह, रतन सिंह, सूरत सिंह, सरदार सिंह, डूंगर सिंह और गंगासिंह के काल के सिक्के, स्टाम्प पैपर एवं स्टाम्प फीस टिकट, रियासतकाल में कोर्ट द्वारा गवाह अथवा मुल्जिम को बुलाने के लिए ली जाने वाली फीस के तलबाना टिकट, अल्लाह जिलाई बाई, आचार्य तुलसी, इंद्रचंद शास्त्री, हरखचंद नाहटा, पन्नालाल बारूपाल सहित बीकानेर की विभिन्न विभूतियों पर जारी डाक टिकट, जोधपुर, उदयपुर सहित विभिन्न रियासतों के कोर्ट स्टाम्प पैपर, सिक्के आदि देखकर दर्शक अभिभूत हुए।

स्वतंत्र भारत का पहला डाक टिकट

इसी प्रकार प्रदर्शनी में स्वतंत्र भारत का पहला डाक टिकट, खादी पर बना विशेष डाक टिकट, नेहरू परिवार, साहित्यकारों, वैज्ञानिकों, स्वंतत्रता सैनानियों, संगीतज्ञों पर जारी डाक टिकटों का अवलोकन भी आमजन द्वारा किया गया। वहीं अब तक जारी हर प्रकार के लिफाफे तथा पोस्ट कार्ड भी आकर्षण का केन्द्र रहे।