भगवान महावीर के मंदिर की प्रतिष्ठा, लाभार्थी का सम्मान

214

बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के ब्रह्मसर तीर्थोंद्धारक उपाध्याय गुरु मनोज्ञ सागरजी म.सा. के सान्निध्य में सोमवार को गंगाशहर मार्ग पर स्थित रेल दादाबाड़ी में नवनिर्मित भगवान महावीर मंदिर अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव धर्मसभा, लाभार्थी परिवार के सम्मान के साथ संपन्न हुआ। मंगलवार को सुबह छह बजे द्वार उद्घाटन व सतरभेदी महापूजन होगा। गुरु मनोज्ञ सागरजी व नयज्ञ सागरजी म.सा. मंगलवार शाम को बीकानेर से विहार करेंगे। वे रात्रि विश्राम तुलसी विहार में कर बुधवार को सूरत के लिए प्रस्थान करेंगे।

मंदिर अंजनशला का विधान सोमवार को बह्ममुहूर्त में गुरु मनोज्ञसागरजी ने करवाया। उसके बाद भगवान महावीर का केवल्य ज्ञान कल्याणक, उद्यापन देशना, निर्वाण कल्याणक विधान, 108 अभिषेक, माणक स्तंभवन आरोपण, तोरण बंधन, शुभ मुहूर्त में भगवान महावीर के साथ देवी पद्मावती व नाकोड़ा भैरव की प्रतिमाओं की स्थापना की गई।

धर्म सभा में जेन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ ट्रस्ट के सचिव शांति लाल सुराणा, सहमंत्री अशोक पारख, कोषाध्यक्ष कंवर लाल, निर्मल पारख, अजीत खजांची, पूर्व सरपंच मेघराज सेठिया, छगन लाल भुगड़ी सहित जैन समाज के प्रतिष्ठित लोगों ने मंदिर निर्माण के प्रमुख सहयोगी गंगाशहर केशरी चंद, झंवर लाल व मनोज सेठिया, रतनी देवी, कस्तुरी देवी, मधु सेठिया के साथ विधिकारक, मंदिर निर्माण में सहयोगी, विचक्षण महिला मंडल व संगीतकार आदि का सहयोग किया। मगन कोचर, सुनील पारख, पिंटू स्वामी व विचक्षण महिला मंडल ने भक्ति गीत पेश किए।

उपाध्याय गुरु मनोज्ञ सागरजी म. सा. ने प्रवचन में कहा कि चार शताब्दी प्राचीन रेलदादाबाड़ी में भगवान महावीर स्वामी के मंदिर का निर्माण जैन शासन के इतिहास में अनुमोदनीय व चिर स्मरणीय रहेगा। गंगाशहर के सेठिया परिवार ने कठिन परिस्थितियों व परीक्षा के बावजूद देव, गुरु व धर्म के प्रतिनिष्ठा, समर्पण भाव से मंदिर का निर्माण का लाभ लेकर युगों-युगों तक अमर पद प्राप्त कर लिया। गायकार पिंटू स्वामी द्वारा गुरु मनोज्ञसागरजी म.सा. के सामने जैन धर्म की मर्यादाओं का पालन करने का संकल्प लिया। मुनि नयज्ञ सागर, साध्वी संयमपूर्णा, श्रद्धानिधि, जैन श्वेताम्बर पाश्र्वचन्द्र गच्छ की साध्वी सुव्रताश्री, पदमप्रभा व मरुत प्रभा का लाभार्थी परिवार की ओर से अभिनंदन किया गया।