पाटा बोला…..’रिसाणी राणी रो हठ योग कद हुसी खत्म’

raani row hathayog
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बीकानेर। मारे गरमी के अपनी लूँगी से मुंह पोंछते हुए आए अनिया महाराज पाटे पर बैठते हुए बोले- ‘आज तो सगळा बाबै ज्यों योग कर रिया, पण आपोरै अठै तो आपोरी राणीजी हठ योग कई मइनों सूं कर रैयी है, फेर भी पार पड़ती लागै कोयनी।’ अनिया महाराज की बात सुनकर पान की पीक थूकने अपनी चोंच खोल कर चोंचिया महाराज बोले- ‘थारै माय आ ही तो गड़बड़ है, थनै डूंगर बळतौ दिखै, घर बळतौ दिखै कोयनी। अबार आपोरों कोलायत रां ठाकर साब भी राणी सूं रीस खायड़ा है। जणै कैवै के हूँ बोटों में खड़ो कोई हुवनी।’

दोनों की बातों को अब तक गौर से सुन रहे उस्तादजी ने पाटे पर ताळ ठोंक कर बोले- ‘ऐ सब कैवण री बात्या है रे, थैं इयै ठाकर नै पूरो जाणो कोयनी। ऐ तो कई जणो नै खाली बात्यां कर र राजी करै रे। थैं हार-जीत कर लो एक-एक सुपारी पत्ती री, ऐ चुनाव लड़ैला।’ इतने में जीमण जीम कर आए सीनजी महाराज से रहा नहीं गया और वे नई सुरसुरी छोड़ते हुए बोले- ‘चोखो टैम आयो है, एक खानी म्हारां साब खड़ा हुवणा चावै पण जोधपुर आळा बियारी टांग खीच रैया है। बामण रो बेटे नै सगळां मारण मैं लाग ग्या। अबै कई कैवो मुंडो बलग्यो फूंक देवण री जग्या कोयनी। जद दोंत जीब नै खासी जाणै कई बचसी।’

इस पूरे वार्तालाप को मौनधारण कर सुन रहे रौमजी महाराज अचानक गरजते हुए बोले- ‘थैं सगळां सूखी हथाई करो, आपोरै तो सीधो सट हिसाब है, म्हांरै टाबरौ नै जको धंधे लगासी म्है तो बैरे सागे रैसो।’ -कोकड़दास, (पाटै सूं लाइव)