पाटा बोला- सैर में गायौं सूं घणा तो गोधा हुयग्या

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बीकानेर। पाटे पर हमेशा से उलट सन्नाटा पसरा हुआ था। चिन्ता की लकीरें पाटेबाजों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। मौन तोड़ा मन्नू महाराज ने और बोले- ‘आज फेर छोरी आळो रो जबाब आयग्यो कैवे म्हारी छोरी हाल पढ़े है, जणे कोई म्हारो छोरो तो अनपढ़ है, बो बियै री कॉपी किताब्या फाड़ देसी। बात्यां करै…।’ दुखी मन्नू महाराज को दिलासा देने की गरज से देव भा बोले- ‘महाराज आ तो दिखती बात लागती छोरो हुवतै ई थाळी बजावणी, बधाई लारै पड़-पड़ पर देवै, अबै बियै छोरो वास्तै छोरयो आळा लारै हुवण लागग्या।’

जुगल भा ने बात बीच मे ही काटी- ‘छोरो री तो पूछ ही रैयी कोयनी। सगळौ नै गोरमेंट रा नौकर चाइजै, कठै सूं लावो।’ इतने में अब तक सब बातों को गौर से सुन रहा भैरु बीच मे बोल पड़ा= ‘मौनली, आदमी तो खोटा करया जणै छोरा घणा ओर छोरयो थोड़ी हुयगी, पण सैर में गायौं कोयनी बियै सूं ज्यादा तो गोधा हुयग्या। बापड़ी गायौं किसी सोनोग्राफी करवाई।’ चलती बहस के बीच अचानक टपका महाराज साइकिल के ब्रेक रोककर टपके और बोल पड़े- ‘अरे आ सोनोग्राफी तो म्हैं कर राखी है। हूँ बताऊं गावों में अबै बळध तो चइजै कोयनी, गाय रै बछड़ों हुवतै ई थोड़े महीनों बाद बै कैम्पर में घाल र सैर रै नैडे छोड़ देवै। पछै ऐ अनाथिया गोधा मारता फिरै। म्युनिसिपल पार्टी आळा आपोरी सुनै कोयनी, सैर आळा तो गोधों सूं मरण वास्तै ही पैदा हुया है।’ –कोकड़दास (पाटैं सूं लाइव)

पाटा बोला…..’रिसाणी राणी रो हठ योग कद हुसी खत्म’

पाटा बोला- ‘राबड़ी कैवे म्हनैं दांतों सूं खावौ’