अब तो सास कह दें कि घर में बेटी चाहिए : मोदी

pm modi in jhunjhunu
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झुंझुनूं (अभय इंडिया न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि बेटियों को बचाने के लिए हमें जन आंदोलन चलाना पड़ेगा। इसके लिए शुरूआत घर से करनी होगी। मदर इन ला यानी सास यदि कहने लगे कि घर में बेटी चाहिए तो फिर यह आंदोलन सफल भी हो जाएगा। मोदी ने गुरुवार को यहां राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरूआत की, साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तीसरे चरण का भी आगाज किया।

पीएम मोदी ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में जब सफलता मिलती है तो मन को एक ंसंतोष होता है, लगता है चलो भाई स्थिति में कुछ सुधार आया। लेकिन कभी-कभी मन को बहुत बड़ी पीड़ा होती है। पीड़ा इस बात की होती है कि जिस देश की महान संस्कृति, परंपराएं शास्त्रों में उत्तम से उत्तम बातें वेद से विवेकानंद तक सही दिशा में प्रबोधन मिलता है, लेकिन क्या कारण है, वो कौनसी बुराई घर कर गई कि आज हमें अपने ही घर में बेटी बचाने के लिए हाथ पैर जोडऩे पड़ रहे है, समझाना पड़ रहा है। बजट से धन खर्च करना पड़ रहा है। कई दशकों से विकृत मानसिकता गलत सोच के कारण हमने बेटियों को ही बलि चढ़ाने का रास्ता चुन लिया। हजार बेटों के सामने कहीं आठ सौ, कहीं नौ सौ बच्चियां है।

पीएम मोदी ने कहा कि स्त्री-पुरुष की समानता से ही समाज का चक्र चलता है। कई दशकों से बेटियों को नकारते और मारते रहे हैं। उसी का नतीजा है कि समाज में असंतुलन पैदा हुआ है। चार-पांच पीढिय़ों की बुराइयां आज इकट्ठा हुई है। पुराना ढांचा सही करने में समय लगेगा, लेकिन अब हम तय करें कि जितने बेटे पैदा होंगे उतनी ही बेटियां पैदा होगी। जितने बेटे पढेंग़े उतनी ही बेटियां भी पढ़ेगी। जो चार पीढ़ी में बुरा हुआ वो हम दो-तीन पीढ़ी में सही कर सकते है। जो दस जिले इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर सम्मानित हो रहे हैं उनको मैं मन से बधाई देता हूं। उन्होंने पवित्र काम को अपने जिम्मे लिया। मोदी ने सभी राज्यों की सरकारों से अनुरोध किया कि वे बेटी बचाने के काम को जन आंदोलन बनाए। पीएम मोदी ने कहा किहरियाणा में स्त्री-पुरुष अनुपात चिंताजनक था, लेकिन हमने वहां कार्यक्रम की शुरूआत कर दी। आज हरियाणा को बधाई देता हूं वहां दो साल में अनुपात काफी सुधरा है।

बेटी आन, बान और शान
पीएम मोदी ने कहा कि बेटी बोझा नहीं, बल्कि परिवार की आन-बान-शान होती है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना देश के सभी जिलों में लागू की जा रही है। मोदी ने कहा कि कई लोग सोचते है कि बेटा बुढ़ापे में काम आएगा, लेकिन मैने देखा कि जिने चार बेटे हैं, गाड़ी और बंगले भी है, लेकिन उनके बूढ़े मां-बाप अनाथ आश्रम में रहते हैं। ऐसे परिवार भी मैंने देखे हैं जहां एक ही बेटी है, लेकिन वो काम करती है और मां-बाप की सेवा करने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देती है। मोदी ने कहा कि 18वीं सदी में बेटियों को मार दिया जाता था, लेकिन 21वीं सदी में भी यही हो रहा है। तब कम से कम बेटी को कोख में तो नहीं मारा जाता था। वो चाहे कुछ पल के लिए ही, पर अपनी मां का चेहरा तो देख पाती थी, लेकिन आज आधुनिक विज्ञान की मदद से बेटी को कोख में ही मार दिया जाता है। यह सबसे बड़ा पाप है।