लैब संचालक सावधान! अब इस गाइड लाइन पर चलना ही पड़ेगा

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जयपुर (अभय इंडिया न्यूज)। ब्लड, यूरीन, ब्लड शुगर, लीवर फंक्शन, लिपिड प्रोफाइल, कैल्शियम, इलेक्ट्रोलाइट, ब्लड क्लोटिंग सरीखी जांच करने वाली सरकारी व निजी पैथोलोजी लैब को क्लीनिकल एस्टेब्लीशमेंट एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य हो गया है। उन्हें पहले अस्थायी (प्रोविजनल) और उसके बाद स्थायी पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण संबंधित जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में करवाना होगा।

इस एक्ट के अनुसार लैब के बाहर रेट लिस्ट लगानी होगी, जिस पर जांच और शुल्क का ब्यौरा होगा। इसके साथ ही स्टाफ की योग्यता भी लिखनी होगी। सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर नियमों की पालना के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव, मिशन निदेशक (नेशनल हैल्थ मिशन), समस्त जिला कलेक्टर, जोन के संयुक्त निदेशक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) को जिम्मेदारी दी है।

एक्ट से जुड़े प्रावधानों के संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि पैथोलोजी लैब का रजिस्ट्रेशन कराने पर मानकों पर खरा उतरने से जांच रिपोर्ट सही मिलेगी। इससे बीमारी का इलाज करना आसान हो जाएगा। नोटिस बोर्ड पर रेट लिखी होने से मनमानी तरीके से नहीं वसूल सकेंगे। इसके अलावा मरीजों की जिन्दगी से खिलवाड़ करने वालों व गैर कानूनी तरीके से चलाने वालों पर रोक लगेगी। वर्तमान में अप्रशिक्षित के हाथों में होने से मरीजों की जान को खतरा है।

ये पालना भी करनी होगी

-लैब के बाहर नोटिस बोर्ड पर रजिस्ट्रेशन नंबर, प्रभारी का नाम, उपलब्ध जांच सुविधा व प्रकार लिखना होगा।

-बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की पालना

-पंजीकरण व प्रतिक्षा कक्ष, टॉयलेट की सुविधा

-पुरुष व महिला के लिए अलग-अलग कमरा, स्टाफ व डॉक्टर रुम

-नमूने और स्लाइड का संरक्षण

-एचआईवी जांच की सुविधा होने पर अलग से कक्ष होना चाहिए

-समय निर्धारण के लिए टेलिफोन व मोबाइल नंबर

-शिकायत पुस्तिका, बिजली व पानी की सुविधा

-लैब के बाहर व अंदर साइनेज लगे होने चाहिए

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