स्थापना दिवस समारोह में 51 विभूतियों को ‘सनातन सम्मान’

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बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। सनातन धर्म साधना पीठ का पांचवां स्थापना दिवस समारोह रविवार को उस्ता बारी के बाहर स्थित वाचनालय में आयोजित किया गया। इस दौरान सनातन धर्म की परम्पराओं और मान्यताओं को प्रचारित करने वाली 51 विभूतियों को ‘सनातन सम्मान’ अर्पित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेश चूरा ने कहा कि सनातन धर्म आदि काल से है और अनंतकाल तक रहेगा। यह धर्म हमें जीव मात्र के प्रति दया की भावना सिखाता है। बड़ों का आदर और छोटों के प्रति स्नेह की सीख देता है। सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी हरि शंकर आचार्य ने कहा कि आज के दौर में सनातन धर्म के संस्कारों, सिद्धांतों एवं मान्यताओं को अक्षुण्ण रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पीठ द्वारा इस दिशा में श्रेष्ठ कार्य किया जा रहा है। पीठ द्वारा सनातन संस्कृति की रक्षा में जुटे लोगों का सम्मान करना अनुकरणीय है।

उद्योगपति जुगल राठी ने कहा कि जरूरतमंद लोगों की नि:स्वार्थ भाव से सेवा करनाए सनातन धर्म के मूल में है। यह धर्म ‘परहित सरिस धरम नहीं भाई’ की सीख देता है। ऐसा करना अपने आपमें सनातन धर्म के सिद्धांतों को पल्लवित और पोषित करना है। युवा भाजपा नेता दीपक व्यास ने कहा कि युवाओं को एक बार फिर सनानत धर्म की मान्यताओं के अनुसरण की ओर बढऩा चाहिए। इससे भारत को पुन: विश्व गुरु बनाया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मंडप विशेषज्ञ पंडित प्रहलाद दत्त ओझा ने कहा कि सनातन धर्म ने सदैव दुनिया का मार्गदर्शन किया है। आज ऐसे प्रयासों की जरूरत है, जो विश्व में भारत का मना और अधिक बढ़ा सके।

इससे पहले अतिथियों ने आदिगुरु शंकराचार्य की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन तथा पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। पंडित भाईश्री ने पीठ की स्थापना के उद््देश्य, अब तक आयोजित कार्यक्रमों और भावी रूपरेखा के बाारे में बताया। पीठ के प्रवक्ता पं. हरि मोहन पुरोहित ने आगंतुकों का आभार जताया। इस अवसर पर 51 सनातनी धर्मावलम्बियों का दुपट्टा ओढ़ाकर तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन पवन राठी ने किया।