संपूर्ण अस्त होकर

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ऐ दोस्त तुम्हारा याराना
टिकाऊ नहीं है
सुन ले मेरे यार मेरा
प्यार बिकाऊ नहीं है
तुम भी शामिल होना मेरे जनाजे में
जिस तरह जख्म दिये हैं
उसी तरह कंधा भी देना
बढ़ते रहना आगे कंधे
बदल-बदल कर
मैं कुछ न कहूंगा
मैं तब भी खामोश
अब भी खामोश रहूंगा
लडख़ड़ाने मत देना पाँवों
को मेरे दोस्त
तोहमत लगाते समय जीभ कब लडख़ड़ाई थी
आग की लपटों से डरना मत
चिंगारी जो तूने लगाई थी
मैं तो खाक बनकर उड़ जाऊंगा
अपनी व$फा की साख
लिये ही जाऊंगा
पर अ$फसोस मैं पूरी तरह
कहाँ जा पाऊंगा
भले ही कितने ही लगा लेना
चेहरे पे चेहरे
मिटा देना मेरी हस्ती को
मदमस्त होकर
फिर भी मैं थोड़ा बाकी रहूंगा तुझमें
संपूर्ण अस्त होकर।

– नगेन्द्र नारायण किराडू
कवि-कहानीकार