तलाशी में सामने आई आईएएस की करोड़ों रुपए की ‘करतूतें’

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ias nirmala File photo
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जयपुर (अभय इंडिया न्यूज)। आईएएस अफसर निर्मला मीणा के ठिकानों पर तलाशी से पता चला है कि वो काफी मालदार है। उसके पास करोड़ों रुपए की संपत्ति होने का खुलासा हुआ है। बेशकीमती जमीनों के अलावा वो पेट्रोल पंप की मालकिन भी है। जोधपुर में जिला रसद अधिकारी पद पर रहते हुए उसने करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली। गरीबों को मिलने वाले 35 हजार क्ंिवटल गेंहू घोटाला मामले में आरोपी निलम्बित आईएएस अफसर निर्मला मीणा ने विभागीय कर्मचारियों, आटा मिल मालिकों एवं राशन डीलर्स से मिलीभगत कर करीब आठ करोड़ रुपए मूल्य के गेंहू की कालाबाजारी की थी।

सूत्रों के मुताबिक जांच में पता चला कि निर्मला मीणा और उसके साथियों ने गरीबों में वितरित होने वाले गेंहू को फर्जी राशन कार्ड बनाकर आटे को मिलों तक पहुंचा दिया। इसके एवज में करोड़ों रुपए बटोर लिए। गेंहू घोटाला मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद से फरार चल रही निर्मला मीणा के जोधपुर स्थित ठिकानों पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के दस्ते ने बीते गुरुवार और शुक्रवार को कार्रवाई की। इस दौरान निर्मला के नाम से करीब दस करोड़ रुपए से भी अधिक मूल्य की सम्पति के दस्तावेज मिले। इसके अलावा उसके बेटे और अन्य रिश्तेदारों के नाम से जोधपुर, जयपुर और नोएडा में आवास और दो बैंकों में तीन लाख रुपए की एफ.डी. के दस्तावेज भी मिले हैं। सूत्रों की मानें तो निर्मला नाम से जयपुर में 2, जोधपुर में 5 मकान, एक पेट्रोल पम्प, 20 बीघा जमीन और एक दुकान होने के दस्तावेज मिले हैं। घोटाले में मीणा का सहयोग करने के आरोप में उनके तत्कालीन निजी सहायक अशोक पालीवाल, आटा मिल मालिक स्वरूप सिंह उपाध्याय के जोधपुर स्थित आवासों पर भी छापे मारे गए, वहां भी आय से ज्यादा सम्पतिके दस्तावेज सामने आए हैं।

लगा रखी थी जमानत याचिका

पता चला है कि निर्मला व पालीवाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका लगा रखी है। उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई 15 मार्च को तय की, तब तक इनकी गिरफ्तारी रोकी है, लेकिन फिर भी ये फरार चल रहे हैं। उधर, आटा मिल मालिक स्वरूप सिंह पुरोहित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के रिमांड पर चल रहा है। छापेमारी के लिए एसीबी ने न्यायालय से पांच मार्च को सर्च वारंट जारी कराया था। वहीं प्रदेश के खाद्य मंत्री बाबूलाल वर्मा ने दावा किया है कि उक्त मामले में जो भी आरोपी है, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। गरीबों के हिस्से का गेंहू उन्हे ही मिलना चाहिए, अधिकारियों को कालाबाजारी करने का हक नहीं है।