जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू, फिर शुरू होगा एंटी टेरर ऑपरेशंस

जम्मू। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आदेशानुसार जम्मू-कश्मीर में तत्काल प्रभाव से राज्यपाल शासन लागू हो गया है। मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी द्वारा पीडीपी सरकार के बीच ब्रेक-अप हो गया था। भाजपा की ओर से गठबंधन तोड़े जाने के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस्तीफा दे दिया। मंगलवार को राज्यपाल एनएन वोहरा ने घाटी के हालात पर राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंप कर राज्यपाल शासन लागू करने का सुझाव दिया था। राज्यपाल ने कश्मीर की सभी प्रमुख चार पार्टियों के नेताओं से बात की, मगर सबने सरकार बनाने के लिए गठबंधन के रास्ते तलाशने से इनकार कर दिया।

भारत के अन्य राज्यों में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू होता है, मगर जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं है। जम्मू-कश्मीर संविधान की धारा 92 के तहत यहां राज्यपाल का शासन लागू होता है। यह छह महीने तक लागू रहेगा और इन दौरान राज्यपाल के पास विधायी शक्तियां रहेंगी।

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने एजेंसी एएनआई से कहा है कि हमने सिर्फ रमजान के दौरान ऑपरेशन रोके थे लेकिन हमने देखा कि क्या हुआ। राज्यपाल का शासन लगने का हमारे ऑपरेशंस पर कोई असर नहीं होगा। हमारे ऑपरेशंस वैसे ही चलेंगे जैसे पहले होते थे। हम किसी राजनैतिक हस्तक्षेप का सामना नहीं करते।

शहीद औरंगजेब के परिवारवालों से मिली रक्षामंत्री

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को शहीद राइफलमैन औरंगजेब के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की। जम्मू एवं कश्मीर में 15 जून को आतंकवादियों ने औरंगजेब को अगवा कर उनकी हत्या कर दी थी। रक्षा मंत्री दिन बुधवार सुबह यहां पहुंची और राजौरी जिले के मेंढर इलाके में शोकाकुल परिवार से मुलाकात की। निर्माला सीतारमण ने पत्रकारों सेस बातचीत के दौरान कहा कि मैं शहीद के परिवार के साथ कुछ समय बिताने आई हूं और मैं जिस संदेश के साथ आई हूं, वह यह है कि शहीद सैनिक पूरे देश के लिए प्रेरणा है। शहीद के पिता ने भी सेना में रहकर देश की सेवा की है।

2014 विधानसभा चुनावों का ये था परिणाम

87 सदस्यीय विधानसभा के लिए 2014 में चुनाव हुए थे, जिसमें पीडीपी को 28, नेशनल कांफ्रेंस को 15, भाजपा को 25, कांग्रेस को 12, पीपुल्स कांफ्रेंस को दो, माकपा, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट को एक-एक सीटें मिली थीं और तीन निर्दलीय निर्वाचित हुए थे।