इन 12 जिलों में उद्योगों के विकास की संभावनाएं तलाशेगी सरकार

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Chief Minister Of Rajasthan Vashundhara Raje
Chief Minister Of Rajasthan Vashundhara Raje

जयपुर (अभय इंडिया न्यूज)। चुनावी साल के मद्देनजर राज्य सरकार को अब सभी क्षेत्रों की याद आने लगी है। उद्योगों को गति देने के लिहाज से सरकार ने अपनी नीतियों में कुछ बदलाव के संकेत भी दिए हैं। इसी क्रम में प्रदेश के एक दर्जन जिलों को चुना गया हैं, जहां औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं नजर आ रही है।

सूत्रों के अनुसार प्रदेश के एक दर्जन जिलों में बीकानेर, अलवर, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौडग़ढ़, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, जैसलमेर, सिरोही तथा जयपुर चुने गए हैं। इनमें टेक्सटाइल, केमिकल्स, इंजीनियरिंग, फार्मा, माइन्स एण्ड मिनरल्स, एग्रो फूड इंडस्ट्री, मेटल्स, मार्बल सहित अन्य औद्योगिक विकास की संभावना तलाशी जाएगी। भीलवाड़ा में टेक्सटाइल, केमिकल्स, इंजीनियरिंग तथा फार्मा को महत्व दिया गया है। भीलवाड़ा में टेक्सटाइल के बाद सिरेमिक जोन, माइंस एण्ड मिनरल्स उद्योग की संभावना है। हालांकि इनको नहीं जोड़ा गया है। औद्योगिक विकास को लेकर अजमेर में 16-17, भीलवाड़ा में 17 व 18, चित्तौडग़ढ़ में 18-19, उदयपुर में 19-20 जुलाई को बैठक होगी।

जानकारी मिली है कि उद्योग आयुक्त कृष्ण कुणाल के नेतृत्व में अधिकारियों का दल इन जिलों का दौरा कर विकास की संभावनाओं पर फीड बैक लेगा। औद्योगिक संगठनों की समस्याएं सुनेंगे और निराकरण का प्रयास करेंगे। सोमवार को उद्योग आयुक्त ने 12 जिलों के उद्योगों अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग की। अधिकारियों की टीम 17 व 18 जुलाई को भीलवाड़ा में रहेगी।

जिलो में उद्योगों को क्या समस्या आ रही है, इस बारे में औद्योगिक संगठनों से राय ली जाएगी। निर्यात परिदृश्य, औद्योगिक समस्या, राजस्थान इन्वेस्टमेन्ट प्रमोशन स्कीम के तहत उद्योगों में क्या बदलाव लाया जा सकता। उद्यमियों के सामने आ रही समस्या जैसे जमीन, पानी, बिजली के बारे में चर्चा होगी। इसके अलावा कलक्टर, जिला उद्योग केन्द्र, रीको, राजस्थान राज्य वित्त निगम, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, बिजली तथा जल संसाधन विभाग के अलावा उद्योगों से जुड़े विभाग के अधिकारियों की बैठक लेंगे।

इधर, उद्यमियों ने इसे चुनावी वर्ष में कागजी या उद्यमियों को रिझाने की योजना बताई। उनका कहना है कि सरकार साढ़े चार साल बिताने के बाद अब उद्योगों के विकास की बात कर रही है। यही काम यदि पहले शुरू होता तो अब तक इसके सकारात्मक नतीजे भी सामने आ जाते। अब चुनाव के ऐनवक्त ऐसी कवायद से उद्योगों का कोई भला नहीं होने वाला है।