चुनावी खबर : बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में पड़े सर्वाधिक फर्जी वोट, कोलायत में आंकड़ा जीरो

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बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। विधानसभा चुनाव 2013 में निर्वाचन आयोग की फर्जी मतदान रोकने की लाख कोशिश और सख्ती के बावजूद बीकानेर जिले में 106 जने फर्जी मतदान कर चलते बने। मतदान अधिकारी को भी फर्जी मतदान का पता तब चला, जब वाास्तविक मतदाता आवश्यक दस्तावेज व फोटोयुक्त पहचान पत्र लेकर मतदान के लिए पहुंचा।

विधानसभा चुनाव 2013 के दौरान बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 58 मतदाताओं, लूनकरणसर में 17, नोखा में 12 बीकानेर पश्चिम में 9, श्रीडूंगरगढ़ में 5, वास्तविक तथा खाजूवाला में 2 मतदाताओं की जगह कोई फर्जी वोट देकर चला गया। जब वास्तविक मतदाता मतदान के लिए पहुंचे तो मतदान अधिकारी के पास मौजूद सूची में उनके नाम के आगे मतदान किया हुआ का चिह्न देखकर उनके पांवों तले जमीन खिचक गई। मतदान अधिकारी की ओर से उन मतदाताओं को बताया गया कि उनका मतदान तो हो चुका है। कुछ मतदाता वापस लौट गए तो, कुछ मतदाता मतदान के लिए अड़ गए। ऐसे में उन्हें टेंडर वोट डलवाया गया।

गत विधानसभा चुनाव में बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 59 टेंडर वोट पड़े, जबकि कोलायत में टेंडर वोट का आंकड़ा शून्य रहा। इसी तरह लूनकरणसर में 17, नोखा में 12, खाजूवाला में 2, श्रीडूंगरगढ़ में 5 तथा बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में 9 टेंडर वोट डाले गए।

क्या है टेंडर वोट, नहीं होती गिनती

किसी मतदान केंद्र पर वास्तविक मतदाता की जगह कोई अन्य फर्जी व्यक्ति मतदान कर चला जाता है तो निर्वाचन विभाग के निर्देशानुसार वास्तविक मतदाता को मतदान करवाना अनिवार्य है। किसी अन्य व्यक्ति की ओर से ईवीएम पर मतदान के बाद वास्तविक मतदाता के बूथ पर पहुंचने पर उसे बैलेट से मतदान करवाया जाता है। वास्तविक मतदाता बैलेट पेपर पर प्रत्याशी के आगे मत देने चिह्न लगाकर उस मत को एक लिफाफे में बंद कर मतदान अधिकारी को लिफाफा थमा देता है। मतदान के बाद मतगणना में वैसे तो टेंडर वोट की गिनती नहीं होती है। लेकिन जीत का अंतर कुल टेंडर वोट की तुलना में कम होने पर लिफाफे को खोलकर टेंडर वोट की गिनती की जाती है।

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