डिजिटल लव (आचार्य ज्योति मित्र का बदलते जमाने पर व्यंग्य)

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आचार्य ज्योति मित्र

अरे! यारों दिल-विल, प्यार-व्यार, लव… इन सब बातों से हम तो कोसों दूर रहे हैं या ये समझ लीजिए कि ये अपनी मजबूरी थी। जीवन के 50 वर्ष पूर्ण होने के बाद आज अचानक हमारे मन मंदिर में कुछ-कुछ होने लगा। अब आप पूछेंगे कि पतझड़ के दौर में यह प्यार का अंकुर कहां से फूट पड़ा! तो भैया यह कम्प्यूटर का युग है। इस कम्प्यूटर विज्ञान ने हमें फेसबुक व व्हाट्सएप जैसे साधन दे दिये। फेसबुक में हमें भी महबूबा के फेस मिल गए। वो भी एक-दो नहीं, सैकड़ों की तादाद में।

जब प्यार-व्यार की उम्र थी तो बाबूजी के डर से हमने इससे दूर रहने में ही अपनी भलाई समझी। सच बताऊं तो कभी एफ्ट्र्स करने की हिम्मत ही नहीं हुई। डर लगता था कि कहीं हमारी हीरोइन हल्ला न मचा दे। विज्ञान ने जमाने को काफी कुछ बदला है। ये बदलाव प्यार जैसे अहसास में भी आया है। अब प्रेमिकाओं से डायरेक्ट एप्रोच का जमाना है। इस डिजिटल लव में पारंगत मेर एक मित्र बताते हैं कि ट्रायल कही भी ली जा सकती है, कोई खतरा नहीं। ज्यादा से ज्यादा अनफ्रेंड कर देगी, ब्लॉक कर देगी, कोई बात नहीं…कर दे, तू नहीं तो और सही… के सिद्धांत पर ही मेरा व मेरे समवय के साथियों का दिल धड़क रहा है व अंगुलियां एंड्रॉयड फोन पर नाच रही हैं ।

अब चाँद को देखकर अपनी महबूबा का फेश तलाशने का झंझट भी खत्म। जब भी दिल मचले सीधे फोन पर फोटो के साथ दीदार करो। मैसेंजर में चैट कर अपने प्यार का इजहार करो। इस दीवाने को कोई रोके ना कोई टोके ना। शायद इसीलिए अब किसी मेघ को दूत बनाने की गरज ही नहीं पड़ती। भले मानुषों, जब मेघदूत की जरूरत ही नहीं तो कालिदास जैसे कवि अब कहां से पैदा होंगे!

आज के फेसबुकिया लव ने देखते ही देखते बेचारे कबूतरों को भी बेरोजगार कर दिया है। ऐसे दौर में ‘कबूतर जा-जा…’ जैसे गाने बेमानी लगने लगे हैं। वहीं इस तिलस्मी लव ने उनके लिए भी संभावना के नए द्वार खोल दिए हैं, जो अपने समय में चाह कर भी किसी से प्रेम की पींगे नहीं बढ़ा पाए थे। वे लोग भी अपनी चुकी हुई जवानी के साथ खूबसूरत बनकर कुछ प्रेमिकाएं बनाने का मार्ग तो प्रशस्त कर सकते हैैं।

कहते हैं कि मुगल बादशाहों के हरम में सैकड़ों-हजारों की तादाद में महिलाएं होती थी। मुगलों को तो मरे-खपे सैकड़ों साल बीत गए, लेकिन लगता है कि भारत में उनकी आत्माएं आज भी भटक रही हैैं? इस 21वीं शताब्दी में कुछ मुगलिया अवतार फिर जीवंत हो उठे हैं। अब बादशाहों के हरम में कितनी बेगम थी, ये उनकी मजबूरी थी या गौरव की बात, वह तो वे ही जाने। हमारे फेसबुकिया लवर्स की फ्रेंड लिस्ट भी किसी हरम से कम नहीं होती। भरी महफिल में जब हमारे मुगलिया अवतार ये कहकर कि हमसे फेसबुक में तीन हजार लोग जुड़े हैं, जिसमे दो हजार तो लड़कियां व महिलाएं हैं। कोई तीन सौ तो लाइक भी करती हैं। ‘लाइक करती हैं’ जैसे वाक्य को वे जिस अंदाज में कहते हैं, वो दूसरे डिजिटल लवर्स को गहरे तक चोट करता है। किसके, कितनी महिला फ्रेंड हैं, ये सोशियल स्टेट्स का नया पैमाना बन गया है।

बीसवीं शताब्दी में लिंग परिवर्तन कर पुरुष से महिलाएं महिला से पुरुष बनने पर बड़े-बड़े अखबारों की लीड खबर बनी थी। उन डॉक्टरों की पीठ थपथपाई गई थी, जिन्होंने ये चमत्कार कर दिखाया था। चमत्कार आज भी हो रहे हैं, लेकिन इसे डिजिटल लव का हुनर कहें तो इसके साथ न्याय होगा। इस प्यार की पगडण्डी पर कब कोई आज्ञाराम बिना किसी आज्ञा के किसी एंजेल अवनी का अवतार ले सकता है। कोई मुन्नालाल अपनी मायावी शक्तियों से मिस माया बन जाता है। ये बात अलग है कि ये मायावी शक्तियां मोबाइल फोन में ही कैद हैं। मोबाइल ही उनका डॉक्टर है तो वही ऑपरेशन थिएटर है, जिसमें लिंग परिवर्तन जैसा क्रांतिकारी कांड होता है। -आचार्य ज्योति मित्र, उस्ता बारी के अंदर, बीकानेर-334005, मो. 9829156367

साहित्य में सुपारी वाद

पाटा बोला…..’रिसाणी राणी रो हठ योग कद हुसी खत्म’