इसी माह होगी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री की घोषणा

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जयपुर (अभय इंडिया न्यूज)। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के पद पर नियुक्ति को लेकर भले ही देरी हो गई हो, लेकिन इसमें अब और ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। इसी महीने के दूसरे पखवाड़े में पार्टी अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश में उप मुख्यमंत्री और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष की भी नियुक्तियां हो सकती है। भाजपा इन नियुक्तियों के माध्यम से अपने परम्परागत वोट बैंक राजपूत, वैश्य और ब्राहम्ण समाज की बढ़ती नाराजगी को कम करने की कोशिश भी कर सकती है।

पार्टी सूत्रों की मानें तो डैमेज कंट्रोल के तहत ये नियुक्तियां की जा सकती है। केन्द्रीय नेतृत्व यह तो मानता है कि वसुंधरा राजे के मुकाबले पार्टी में कोई लोकप्रिय नेता नहीं है, लेकिन आम लोगों की राज्य सरकार से बढ़ती नाराजगी, कार्यकर्ताओं की अनदेखी और ब्यूरोक्रेसी के बेलागाम होने के कारण एंटी इंकंबेंसी फैक्टर अधिक हो गया है। दो माह पूर्व सम्पन्न दो लोकसभा, एक विधानसभा और पंचायत एवं स्थानीय निकाय उप चुनाव में भाजपा की करारी हार इंटी इंकंबेंसी फैक्टर का ही परिणाम माना जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि केन्द्रीय नेतृत्व प्रदेश में राजपूत समाज की मुख्यमंत्री से नाराजगी को लेकर अधिक चिंतित है। भाजपा के 38 साल के इतिहास में राजपूत समाज अधिकतर समय भाजपा के साथ रहा है, लेकिन पिछले दो सालों से यह समाज वसुंधरा राजे सरकार से नाराज चल रहा है। अजमेर और अलवर लोकसभा सीटों एवं मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव में राजपूत समाज ने खुलकर भाजपा की खिलाफत की थी।

इसी तरह ब्राह्मण और वैश्य समाज की नाराजगी भी चिंता का कारण बनी हुई है। ब्राह्मण समाज सत्ता एवं संगठन में कम प्रतिनिधित्व को लेकर नाराज है। वसुंधरा राजे के 30 सदस्यीय मंत्रिमंडल में दो ब्राहम्ण मतदाता है, इनमें से एक अरूण चतुर्वेदी के पास सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता एवं राजकुमार रिणवां के पास देवस्थान विभाग का जिम्मा है। ब्राह्मण समाज इन दोनों ही विभागों को कम महत्व के विभाग मानता है। वैश्य समाज जीएसटी और नोटबंदी के कारण पहले से ही नाराज चल रहा है। गुर्जर समाज ने 15 मई को महापंचायत कर आरक्षण आंदोलन की घोषणा कर दी है। इन सब के चलते ही केन्द्रीय नेतृत्व शीघ्र ही राजस्थान सत्ता और संगठन को लेकर बड़े फैसले कर सकता है।

गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केन्द्रीय नेतृत्व पहले ही केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का नाम तय कर चुका, लेकिन वसुंधरा राजे खेमा उन्हे अध्यक्ष के रूप में स्वीकारने को तैयार नहीं है। हालांकि इस नेता ने बताया कि अब तक के हालात में शेखावत का अध्यक्ष बनना तय लगता है। इधर, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुरूवार को एक आदेश जारी कर जोधपुर के पूर्व सांसद जसवंत सिंह विश्नोई को राज्य खादी एवं ग्रामोधोग बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया है। जसवंत सिंह का विश्नोई समाज में काफी प्रभाव माना जाता है। जसवंत सिंह की नियुक्ति के पीछे विश्नोई समाज को भाजपा से जोडऩे की रणनीति मानी जा रही है।