भाटी ने छोड़े अर्जुन पर बाण, चुनाव नहीं लडऩे का भी ऐलान

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devisingh bhati file photo

बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता देवीसिंह भाटी ने दो अप्रेल को भारत बंद के दौरान हुई हिंसा पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह आने वाले समय में वर्ग संघर्ष होने का संकेत लग रहा है। भाटी ने मंगलवार को पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में केन्द्रीय राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल का बिना नाम लिए इशारों में कहा कि जब हिंसा फैल रही थी तब उन्हें लोगों को समझाने के लिए आगे आना चाहिए था। उनके अगुवा नेता कहलाते है, लेकिन वे सामने ही नहीं आए। किसी को समझाने का प्रयास ही नहीं किया। भाटी को नाम पूछने पर कहा कि नाम लेने की जरूरत नहीं है, सब समझते है।

सार्दुल क्लब में हुई प्रेसवार्ता के दौरान भाटी ने ऐलान किया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन ‘ठरका पंचायती’ जरूर रखेंगे। इसमें अपना पूरा समय बिताना अब लक्ष्य है। जनहित के मुद्दों पर काम करते रहेंगे। ऐसे कार्यों के लिए राजनीति की जरूरत नहीं है। जनता की सेवा में समय बिताना ही सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने कहा कि अभी तक कई बीमार लोगों का वे देशी पद्धति से इलाज कर चुकें है। इसमें कैंसर और एड्स जैसे रोग के मरीज भी शामिल रहे है जिनकों इस पद्धति के इलाज से आराम मिला है।

कॉरपोरेट घराने रहे हैं सिस्टम

पूर्व मंत्री भाटी ने कहा कि अंग्रेजों से आजाद हुए भारत को 70 वर्ष हो गए और आज भी व्यवस्थाएं ठीक वैसी है जैसी पहले थी। इतने वर्षों के बाद भी व्यवस्था नहीं बदली है, अभी भी व्यवस्थाएं कॉरपोरेट घराने ही चला रहे। इतने वर्षों में कुछ भी नहीं बदला। आज देश एक अलग ही भूमिका में रहा है। सारा सिस्टम सरकार के पास ही नियंत्रित है, हर चीज की परमिशन लेनी पड़ती है। लोकसभा और विधानसभा में सब नाटकबाजी होती है।

ठीक नहीं ये हालात…

पूर्व मंत्री ने भारत बंद के दौरान हुई हिंसा को लेकर कहा कि यह वर्ग संघर्ष के संकेत हैं। आंदोलन का रूप ठीक नहीं है। जिनको भी इससे नुकसान हुआ उसकी क्षतिपूर्ति कभी नहीं हो सकती। देश को वर्गों में बांटने की साजिशें हो रही है। भाटी ने इस हिंसा के पीछे राजनीतिक साजिश होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि भारत बंद के दौरान यूपी में केवल एससी-एसटी ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों के लोग भी कूद पड़े। उन्होंने भी अपनी नाराजगी इसकी आड़ में निकालने की कोशिश की। भाटी ने इस मुद्दे पर सभी दलों के नेताओं के मूकदर्शक बने रहने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे में तो लोगों का प्रजातंत्र से विश्वास ही खत्म हो जाएगा।