धरणीधर में भरतनाट्यम् की धूम, व्यास बहनों का भव्य अभिनंदन

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बीकानेर के धरणीधर रंगमंच में भरतनाट्यम् की प्रस्तुति देतीं बाल कलाकार कृपा और श्रद्धा व्यास।
बीकानेर के धरणीधर रंगमंच में भरतनाट्यम् की प्रस्तुति देतीं बाल कलाकार कृपा और श्रद्धा व्यास।

बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। चैन्नई की बाल कलाकार कृपा और श्रद्धा व्यास ने रविवार को यहां धरणीधर रंगमंच में भरतनाट्यम् की प्रस्तुति देकर सबका मन मोह लिया। दोनों ने ‘पायोजी मैंने रामरतन धन पायो…., मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो…’ पर आकर्षक नृत्य की प्रस्तुतियां देकर खूब सराहना बटोरी। प्रज्ञालय संस्थान व राजस्थान युवा लेखक संघ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में दोनों बाल कलाकारों का भव्य अभिनंदन किया गया।

इस अवसर लक्ष्मीनारायण रंगा, ओम आचार्य, घनश्याम आचार्य, जनार्दन कल्ला, श्रीलाल मोहता ने श्रीफल, प्रशस्ति पत्र, शॉल व स्मृति चिन्ह से दोनों बालिकाओं और उनकी माता जयश्री का सम्मान किया। कार्यक्रम में रामकिशन आचार्य, चंद्र जोशी, कैलाश रंगा, आरती आचार्य, सुधा आचार्य, पार्षद शिव कुमार रंगा, हीरालाल हर्ष, दिनेश चंद्र सकसेना आदि ने बाल कलाकारों की भरतनाट्यम् के प्रति समर्पण की जमकर सराहना की।

सबसे प्राचीन नृत्य

भरतनाट्यम् को सबसे प्राचीन नृत्य माना जाता है। ये खासतौर से दक्षिण भारत की शास्त्रीय नृत्य शैली है। यह भरत मुनि के नाट्य शास्त्र पर आधारित है। इस नृत्य को तमिलनाडु में देवदासियों द्वारा विकसित व प्रसारित किया गया था। आरंभकाल में इस नृत्य को देवदासियों के द्वारा विकसित होने के कारण उचित सम्मान नहीं मिल पाया, लेकिन २०वीं सदी के शुरू में ई. कृष्ण अय्यर और रुकीमणि देवी के प्रयासों से इस नृत्य को दुबारा स्थापित किया गया। भरत नाट्यम के दो भाग होते हैं। इसे साधारणत: दो अंशों में सम्पन्न किया जाता है, पहला नृत्य और दुसरा अभिनय। नृत्य शरीर के अंगों से उत्पन्न होता है इसमें रस, भाव और काल्पनिक अभिव्यक्ति जरूरी है।