104 साल बाद संयोग, गुरु पूर्णिमा पर ग्रहण, इन राशियों की बल्ले-बल्ले

Chandra Grahan File Photo
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बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। गुरु पूर्णिमा के दिन 27 जुलाई को इस बार सदी का सबसे लंबी अवधि का चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। चंद्र ग्रहण की अवधि 3 घंटे 55 मिनट रहेगी। ज्योतिषियों के अनुसार ये संयोग लगभग 104 वर्षों बाद आ रहा है। चंद्र ग्रहण समूचे भारत सहित एशिया महाद्वीप आस्ट्रेलिया, यूरोप, अफ्रीका, दक्षिणी—उत्तरी अमरिका, हिन्द महासागर व पेसिफिक महासागर में दिखाई देगा। इस वर्ष में यह दूसरा चंद्र ग्रहण है।

इससे पहले जनवरी में चंद्रग्रहण आया था। आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन पडऩे वाले ग्रहण का दोपहर 2.54 बजे से ही सूतक प्रारंभ हो जाएगा। रात 11.54 बजे से ग्रहण का स्पर्श शुरू होगा। एक बजे से खग्रास प्रारंभ हो जाएगा। रात्रि 1.52 बजे ग्रहण मध्य में आएगा। रात 2.44 बजे खग्रास समाप्त हो जाएगा। रात्रि 3.49 बजे ग्रहण का मोक्ष होगा। ग्रहण के दौरान दान—पुण्य, मंत्र जाप, रामधुनि करने का विशेष महत्व है।

ज्योतिषियों की मानें तो यह चंद्रग्रहण उतराषाढ़ व श्रवण नक्षत्र एवं मकर राशि में हो रहा है। लिहाजा इन नक्षत्रों में जन्मे जातकों के लिए अशुभ फलप्रद होगा। शेष राशियों में मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि के लोगों के लिए श्रेष्ठप्रद रहेगा। वृष, कन्या, धनु राशिवालों के लिए मध्यम तथा मिथुन, तुला, मकर व कुंभ राशि के जातकों के लिए नेष्ट फलप्रद रहेगा। अशुभ नक्षत्र व राशिवालों के साथ गर्भवती महिलाओं को भी ग्रहण का दर्शन नहीं करना चाहिए।

अशुभ प्रभाव राशि वालों को ग्रहण के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए मंत्र जाप करना चाहिए। ज्योतिषियों ने बताया कि चंद्र ग्रहण के समय भोजन आदि नहीं करना चाहिए। शुभ कार्य भी नहीं करने चाहिए। इस दौरान सुई और नुकीली चीजों का उपयोग भी नहीं करना चाहिए।